
क्या होता है ‘पंचक’ (सौ.सोशल मीडिया)
Panchak November Mein Kab Hai 2025: इस बार नवंबर महीने का दूसरा और आखिरी पंचक 27 नवंबर से शुरू हो चुका है। हिंदू धर्म ज्यादातर लोग किसी भी शुभ एवं मांगलिक कार्य को करने से पहले शुभ और अशुभ मुहूर्त ज़रूर देखते हैं। कहा जाता है कि, शुभ मुहूर्त में कार्य करने से कार्य में सफलता मिलती है। ऐसे में ज्योतिष-शास्त्र के अनुसार, इसी तरह से हर महीने में पांच ऐसे दिन पड़ते हैं, जिनमें कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है।
इन्हीं में से एक है ‘पंचक’, जिसे ज्योतिष में एक अशुभ काल माना जाता है। पंचांग के अनुसार, जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्र में गोचर करता है, तो इन पांच दिनों की अवधि को पंचक कहा जाता है। आइए जानते हैं पंचक क्या है और इस दौरान किन 5 कामों को भूलकर भी नहीं करना चाहिए-
ज्योतिष-शास्त्र के अनुसार, पंचक पांच नक्षत्रों (धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती) के समूह को कहते हैं। चंद्रमा लगभग 27 दिनों में इन सभी नक्षत्रों से गुजरता है, लेकिन अंतिम पांच नक्षत्रों में चंद्रमा के गोचर की अवधि पंचक कहलाती है।
मान्यता है कि इन पांच दिनों में किए गए अशुभ कार्य पांच गुना (5) तक कष्टकारी फल दे सकते है। यही वजह है कि इस काल को ज्योतिष में शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है।
ज्योतिषयों के अनुसार,पंचक के दौरान लकड़ी या ईंधन इकट्ठा करना या खरीदना अशुभ माना जाता है। इससे अग्नि का भयधनिष्ठा नक्षत्र के दौरान लकड़ी या ईंधन इकट्ठा करना शुभ नहीं माना जाता है। इससे अग्नि का भय रहता है। आग लगने या अग्नि संबंधी दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है।
पंचक के दौरान लकड़ी खरीदने के अलावा,दक्षिण दिशा की यात्रा करना भी अशुभ माना जाता है। दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना जाता है। पंचक के दौरान इस दिशा में यात्रा करने से यात्रा में बाधाएं आ सकती हैं, दुर्घटना या अप्रिय घटना होने का डर रहता हैं। यदि यात्रा करना बहुत जरुरी हो, तो हनुमान जी को 5 फल चढ़ाकर यात्रा शुरू कर सकते हैं।
ज्योतिष बताते हैं कि,पंचक के दौरान घर की छत डालना या भवन निर्माण करना भी अशुभ माना गया है। खासतौर पर रेवती नक्षत्र के दौरान घर की छत डालना अशुभ माना गया है। ऐसा करने से धन हानि और घर में क्लेश होने की स्थिति बन सकती है।
पंचक के दौरान पलंग, चारपाई या किसी भी प्रकार की शय्या का निर्माण करना अशुभ माना जाता है। इससे परिवार के सदस्यों पर कोई बड़ा संकट आने की आशंका होती हैं।
पंचक के दौरान शव का अंतिम संस्कार करते हुए कुछ कार्यो को करनी की मनाही होती है। ऐसी मान्यता है कि यदि पंचक में किसी की मृत्यु होती है और उसका अंतिम संस्कार पंचक काल में किया जाता है, तो उस कुटुंब या निकटजनों में अगले पांच दिनों के भीतर पांच और मृत्यु हो सकती है।
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यदि ऐसी स्थिति आ जाए कि पंचक में शव का अंतिम संस्कार करना ही पड़े, तो किसी योग्य पंडित से पंचक शांति कराकर ही शव का दाह संस्कार करें। इसके साथ ही, शव के साथ कुश के पांच पुतले बनाकर उनका भी दाह संस्कार करना चाहिए। यह पंचक दोष को शांत करता है।






