
Lord Ram (Source. Pinterest)
Lord Ram and Pakistan Connection: वाल्मीकि रामायण के अनुसार भगवान श्रीराम का जन्म उत्तर प्रदेश की पवित्र अयोध्या नगरी में हुआ था, जिसे प्राचीन काल में अवध नगरी के नाम से भी जाना जाता था। अयोध्या न सिर्फ राम जन्मभूमि के रूप में प्रसिद्ध है, बल्कि यह भारतीय सभ्यता और संस्कृति का भी महत्वपूर्ण केंद्र रही है। भगवान राम का जीवन मर्यादा, त्याग और धर्म का प्रतीक माना जाता है।
शास्त्रों में वर्णित है कि 14 वर्षों के वनवास काल में भगवान राम ने अनेक क्षेत्रों की यात्रा की थी। रामायण के अनुसार वे छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश के दंडकारण्य क्षेत्र, कर्नाटक की किष्किन्धा नगरी और अंत में श्रीलंका (तत्कालीन लंका) तक पहुंचे थे। यह यात्रा धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश से जुड़ी मानी जाती है।
रामायण काल में भारत, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका आज की तरह अलग-अलग देश नहीं थे। उस समय इन सभी क्षेत्रों को मिलाकर भारतवर्ष या जंबूद्वीप कहा जाता था। इसलिए उस युग की भौगोलिक सीमाओं को आज के नक्शे से देखना पूरी तरह सही नहीं माना जाता।
कुछ लोगों के बीच यह धारणा है कि भगवान राम वनवास के दौरान पाकिस्तान भी गए थे। हालांकि, वाल्मीकि रामायण या अन्य प्रमुख हिंदू शास्त्रों में इस बात का कोई प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं मिलता कि भगवान राम आज के पाकिस्तान क्षेत्र में गए हों। यह जरूर कहा जा सकता है कि जिन क्षेत्रों से वे गुजरे, उनमें से कुछ इलाके वर्तमान पाकिस्तान से सटे हुए थे, जो उस समय भारतवर्ष का ही हिस्सा थे।
आज भी पाकिस्तान में भगवान राम से जुड़े कई प्राचीन मंदिर मौजूद हैं, जो वहां के हिंदू समुदाय के लिए गहरी आस्था का केंद्र हैं। गौरतलब है कि साल 1947 से पहले पाकिस्तान भारत का ही हिस्सा था। भारत-पाक विभाजन के दौरान कई ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल पाकिस्तान के हिस्से में चले गए, जिनमें भगवान राम के मंदिर भी शामिल हैं।
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भगवान राम का जीवन और यात्रा पूरे भारतवर्ष से जुड़ी रही है। पाकिस्तान से जुड़ा उनका संबंध ऐतिहासिक और भौगोलिक संदर्भों में देखा जाना चाहिए, न कि आज की राजनीतिक सीमाओं के आधार पर।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं।






