
बाथरूम में शीशा (सौ.सोशल मीडिया)
Bathroom Mirror Vastu: आजकल हर घर के बाथरूम में शीशा जरुर लगा होता है। घर के इंटीरियर का अहम हिस्सा बन चुका है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का हर कोना हमारी उन्नति और स्वास्थ्य पर गहरा असर डालता है। ऐसे में बाथरूम हर घर की एक ऐसी जगह है, जहां सबसे अधिक नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है।
अगर बाथरूम में शीशा लगाते समय वास्तु शास्त्र के नियमों की अनदेखी की जाए, तो इसका सीधा असर घर की सुख-शांति पर पड़ता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि वास्तु शास्त्र के अनुसार बाथरूम में शीशा किस दिशा में और किस तरह लगाना शुभ माना जाता है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, बाथरूम में शीशा कभी भी दक्षिण या पश्चिम दिशा में नहीं लगाना चाहिए। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, जिसका असर घर के सदस्यों के मानसिक स्वास्थ्य और आपसी रिश्तों पर पड़ता है।
शीशा हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की दीवार पर लगाना शुभ माना जाता है। इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार बना रहता है और तनाव कम होता है।
अगर बाथरूम में लगे आईने में टॉयलेट सीट साफ दिखाई देती है, तो यह एक बड़ा वास्तु दोष माना जाता है। इससे घर में अनावश्यक विवाद, मानसिक अशांति और स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं।
शीशे को इस तरह लगाएं कि उसमें टॉयलेट सीट दिखाई न दे। जरूरत पड़े तो शीशे की दिशा बदलें या उसे कवर करने का विकल्प अपनाएं।
अक्सर लोग बाथरूम में चटका हुआ या धुंधला शीशा लंबे समय तक लगा रहने देते हैं। वास्तु के अनुसार, ऐसा शीशा नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है और दुर्भाग्य का कारण बन सकता है।
बाथरूम का शीशा हमेशा साफ, चमकदार और सही स्थिति में रखें। अगर शीशा टूट जाए या दरार आ जाए, तो उसे तुरंत बदल दें।
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वास्तु शास्त्र के ये छोटे-छोटे नियम अपनाकर आप बाथरूम से होने वाले नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकते हैं। सही दिशा और सही स्थिति में लगाया गया शीशा न केवल घर की सुंदरता बढ़ाता है, बल्कि परिवार में सुख-शांति और सकारात्मक माहौल भी बनाए रखता है।






