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Parashurama Curse To Karna: महाभारत से जुड़ा एक सवाल अक्सर लोगों के मन में उठता है जिस अस्त्र का प्रयोग कर्ण शापवश भूल गया था, क्या वह भार्गवास्त्र था? सुनने में यह प्रश्न जितना सीधा लगता है, असल में उतना ही उलझा हुआ है। कर्ण के शाप, उनकी अस्त्र-विद्या और युद्ध में हुई घटनाओं को लेकर वर्षों से भ्रम बना हुआ है। आइए, इस पूरे विषय को सरल और ग्रंथसम्मत तरीके से समझते हैं।
सीधे शब्दों में कहा जाए तो नहीं, कर्ण जिस अस्त्र का प्रयोग शापवश भूल गए थे, वह “भार्गवास्त्र” नहीं था। अब इस उत्तर के पीछे की पूरी कथा जानना जरूरी है।
महाभारत के अनुसार, कर्ण ने अस्त्र-विद्या भगवान परशुराम से प्राप्त की थी। परशुराम केवल ब्राह्मण शिष्यों को ही दिव्य अस्त्रों का ज्ञान देते थे। कर्ण ने यह जानते हुए भी स्वयं को ब्राह्मण बताया, जबकि वे क्षत्रिय थे। इसी छल के आधार पर उन्होंने परशुराम से शिक्षा प्राप्त की।
जब परशुराम को कर्ण की वास्तविक जाति का पता चला, तो उन्होंने क्रोधित होकर कर्ण को शाप दिया “जिस समय तुम्हें सबसे अधिक उस दिव्य अस्त्र की आवश्यकता होगी, उस समय तुम उसका मंत्र भूल जाओगे।”
यहां सबसे अहम बात समझने वाली है:
महाभारत युद्ध के दौरान वह क्षण आया जब कर्ण का रथ भूमि में धँस गया। वे अत्यंत संकट की स्थिति में थे और अर्जुन उनके सामने खड़े थे। उसी समय कर्ण ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करना चाहते थे, लेकिन शाप के कारण वे मंत्र का स्मरण नहीं कर पाए। यही वह क्षण था जिसने युद्ध की दिशा और कर्ण के भाग्य को हमेशा के लिए बदल दिया।
“भार्गव” शब्द परशुराम से जुड़ा है, क्योंकि वे भृगु वंश से थे। इसी कारण बाद की लोककथाओं और सामान्य चर्चाओं में यह मान लिया गया कि कर्ण “भार्गवास्त्र” भूल गए थे। लेकिन महाभारत के प्रामाणिक ग्रंथों में कहीं भी यह स्पष्ट नहीं कहा गया कि कर्ण किसी विशेष अस्त्र जैसे भार्गवास्त्र को भूल गए थे।
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कर्ण ने किसी एक अस्त्र को नहीं भूला था।






