
अजीत-शिंदे, फडणवीस
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र के ठाणे जिले के अंबरनाथ में सियासी घटनाक्रम अभी खत्म होता नहीं दिख रहा है। अंबरनाथ नगर परिषद की राजनीति में एक बार फिर बड़ा मोड़ आया है। यहां भाजपा को अजित पवार गुट की एनसीपी से करारा झटका लगा है। पहले भाजपा ने एकनाथ शिंदे की शिवसेना को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस के साथ हाथ मिलाया था, लेकिन अब एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने भाजपा को अंबरनाथ की सत्ता से बाहर रखने के लिए नई रणनीति अपनाई है।
अंबरनाथ में अब एकनाथ शिंदे की शिवसेना, अजित पवार गुट की एनसीपी और एक निर्दलीय पार्षद एकजुट हो गए हैं। इन तीनों ने मिलकर नगर परिषद की सत्ता पर अपना दावा पेश किया है। दरअसल, इन दलों के गठबंधन का मकसद भाजपा को सत्ता से दूर रखना है।
गौरतलब है कि इससे पहले अजित पवार की एनसीपी अंबरनाथ में भाजपा के साथ थी, लेकिन अब एनसीपी ने शिंदे गुट की शिवसेना को समर्थन दे दिया है। इस नए गठबंधन की जानकारी जिला प्रशासन को लिखित रूप में सौंप दी गई है। यह सियासी फेरबदल ऐसे समय सामने आया है, जब हाल ही में कांग्रेस के निलंबित 12 पार्षद भाजपा में शामिल हुए थे। इससे पहले अंबरनाथ में भाजपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन बना था, लेकिन जैसे ही इसकी जानकारी कांग्रेस आलाकमान तक पहुंची, तुरंत कार्रवाई की गई और कांग्रेस ने अपने 12 पार्षदों को पार्टी से बाहर कर दिया। इसके बाद भाजपा ने इन पार्षदों को अपने साथ शामिल कर लिया, जिससे नगर परिषद में उसका कब्जा बना रहा।
60 सदस्यीय अंबरनाथ नगर परिषद में अंबरनाथ विकास आघाड़ी (AVA) को 31 सीटों का बहुमत मिला था। चुनाव में शिवसेना ने 27, भाजपा ने 14, कांग्रेस ने 12 और एनसीपी ने 4 सीटें जीती थीं, जबकि 2 निर्दलीय पार्षद भी चुने गए थे। एक निर्दलीय के समर्थन से अब शिंदे शिवसेना, एनसीपी और निर्दलीय का आंकड़ा 32 तक पहुंच गया है। हालांकि फिलहाल नगर परिषद अध्यक्ष भाजपा से हैं, लेकिन अजित पवार गुट के रुख बदलने से राजनीतिक तस्वीर बदलती नजर आ रही है।
अंबरनाथ ठाणे जिले में स्थित है, जिसे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का गृह जिला भी माना जाता है। हालिया नगर परिषद चुनावों में शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन भाजपा ने अप्रत्याशित गठबंधन कर अध्यक्ष पद और बहुमत हासिल कर लिया था।
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अंबरनाथ में भाजपा-कांग्रेस गठबंधन को लेकर देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि तकनीकी रूप से यहां भाजपा और कांग्रेस का कोई गठबंधन हुआ ही नहीं। यह गलत नैरेटिव फैलाया गया। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर भाजपा और शिवसेना नेताओं के बीच मतभेद के कारण शिंदे की शिवसेना से गठबंधन नहीं हो सका। इसके बाद स्थानीय नेताओं ने कांग्रेस को तोड़ने की कोशिश की, जिसे कांग्रेस ने गठबंधन बताकर प्रचारित किया। फडणवीस ने कहा कि उनका अब भी मानना है कि अंबरनाथ में भाजपा और शिवसेना का गठबंधन होना चाहिए था।






