भारत का अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन अतंरिक्ष के क्षेत्र में ऊंचे शिखर पर है जिसका पूरा श्रेय ‘भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के पितामह’ विक्रम साराभाई को जाता है। जिनका आज जन्मदिन मनाया जा रहा हैं वहीं अंतरिक्ष के लिए उनके द्वारा किए गए प्रयासों को याद किया जा रहा है।
विक्रम साराभाई की जयंती (सौ.सोशल मीडिया)
भारत का अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन अतंरिक्ष के क्षेत्र में ऊंचे शिखर पर है जिसका पूरा श्रेय ‘भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के पितामह’ विक्रम साराभाई को जाता है। जिनका आज जन्मदिन मनाया जा रहा हैं वहीं अंतरिक्ष के लिए उनके द्वारा किए गए प्रयासों को याद किया जा रहा है।
1962 में गठित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति को 15 अगस्त, 1969 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का रूप दिया गया वहीं पर केरल में तिरुअनंतपुरम के पास थुम्बा में देश का पहला रॉकेट लांच कर ‘रॉकेट पिता’ भी बन चुके थे।
साल 1975 में भारत ने एक रूसी कॉस्मोड्रोम से ‘आर्यभट्ट’ उपग्रह को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर दुनिया को चकित कर डाला. यह विक्रम की परियोजना की सफलता थी। मई, 1966 में उन्होंने परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला।
साल 1919 में 12 अगस्त को अहमदाबाद के स्वतंत्रता आन्दोलन को समर्पित एक प्रगतिशील विचारों वाले उद्योगपति परिवार में जन्मे थे तो वहीं पर देश की प्रसिद्ध शख्सियत जवाहरलाल नेहरू, सरोजिनी नायडू इन सभी से नाता रहा।
साल 1962 में उन्होंने शांतिस्वरूप भटनागर पदक प्राप्त किया, तो 1966 में पद्मभूषण. मरणोपरांत उन्हें 1972 में पद्म विभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया।साल 2019 में उनकी जन्म शताब्दी पर इसरो ने विक्रम साराभाई पत्रकारिता पुरस्कार भी शुरू करने की घोषणा की।
भारत के चंद्र मिशन चंद्रयान-2 के लैंडर (जिसको 20 सितंबर, 2019 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरना था) का नाम भी विक्रम रखा गया।