फडणवीस के निर्देशों का पालन करने में देरी, DPC बैठक में अधिकारियों को बावनकुले-जायसवाल ने लगाई फटकार
पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और मंत्री एड. आशिष जायसवाल ने नागपुर जिला नियोजन समिति (डीपीसी) की बैठक में अधिकारियों को क्लास ली। पिछले साल योजना समिति की बैठक के समय तत्कालीन उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस नागपुर के पालक
- Written By: आंचल लोखंडे
पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और मंत्री एड. आशिष जायसवाल ने नागपुर जिला नियोजन समिति (डीपीसी) की बैठक में अधिकारियों को क्लास ली। पिछले साल योजना समिति की बैठक के समय तत्कालीन उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस नागपुर के पालक मंत्री थे। उस बैठक में तत्कालीन पालकमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों को कुछ निर्देश दिए थे। इसका कितना पालन किया गया है? इस संबंध में विभिन्न विभागों द्वारा क्या कार्रवाई की गई है? वर्तमान पालकमंत्री बावनकुले ने इस बारे में जानकारी मांगी।
कई अधिकारी इस संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। इसके बाद बावनकुले और जायसवाल ने कड़ी नाराजगी जताई। राजस्व व जिले के पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में हुई बैठक में वित्त राज्य मंत्री आशीष जायसवाल, सांसद श्याम कुमार बर्वे, विधायक कृष्णा खोपड़े, प्रवीण दटके, विकास ठाकरे, अभिजीत वंजारी, परिणय फुके, चरण सिंह ठाकुर, जिलाधिकारी विपिन इटनकर, मनपा आयुक्त अभिजीत चौधरी, एनआईटी चेयरमैन संजय मीणा, जिप सीईओ विनायक महामुनि व सभी विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
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उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि पिछली बैठक में जनप्रतिनिधियों द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन न करने का अधिकारियों का रवैया ठीक नहीं है। इतना ही नहीं, यह भी पता चला है कि बावनकुले ने बैठक से ही मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारियों को फोन कर नागपुर में कुछ अधिकारों के बारे में शिकायत की थी। पर उस पर भी कोई काम नहीं किया गया।
जायसवाल ने मुद्दा उठाया कि महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के अधिकारी पैसे लिए बिना तकनीकी मंजूरी नहीं देते। तकनीकी मंजूरी के लिए नगरपालिका को 1 लाख रुपये देना पड़ता है। इस आरोप से सभा में खलबली मच गई। पालक मंत्री बावनकुले ने सीधे नगरपालिका, नगर पंचायत के सीओ को भी खड़ा कर सवाल किया कि क्या पैसे की मांग होती है। मजिप्रा के अधिकारी पैसे लेते हैं या राज्य मंत्री झूठ बोल रहे हैं। उनके सीधे सवाल पर सीओ कोई उत्तर नहीं दे सके। मजिप्रा के अधिकारी गैरहाजिर थे तो सीधे मंत्री गुलाबराव पाटिल और प्रधान सचिव को फोन कर कार्यप्रणाली की जानकारी देकर अंकुश लगाने का निर्देश दिया।
पालक मंत्री ने सीओ को जमकर आड़े हाथ लिया और कहा कि एक काम के लिए ठेकेदार को 35 प्रतिशत कमीशन सीओ को देना पड़ता है। यह उचित नहीं है। आपकी एसीबी में शिकायत की जाएगी। सम्पत्ति की जांच भी की जाएगी। उन्होंने अपराधों पर नियंत्रण के लिए नये पुलिस थाने व चौकी तैयार करने के लिए सीमा रचना करने और विद्यमान 5 डीपीसी जोन की जगह कामठी क्षेत्र को जोड़कर 6 डीसीपी जोन करने का निर्देश दिया।
विधायक कृष्णा खोपड़े ने कहा कि बच्चे देश या राज्य के बाहर रहते हैं और बुजुर्ग घर में। ऐसे घरों के फर्जी कागजात तैयार कर जमीन बेचने वाली टोली सक्रिय है। ऐसे मामलों में घरमालिकों को न्याय के लिए चक्कर मारना पड़ रहा है। ऐसे प्रकरणों के लिए तत्कालीन सीपी व्यंकटेशन ने विशेष दस्ता बनाया था। बावनकुले ने उसी तर्ज पर दस्ते तैयार करने का निर्देश दिया।
प्रवीण दटके की शिकायत पर बंद सीसीटीवी प्रकरण के मामले पर संबंधित मंत्री के साथ बैठक करने का आश्वासन दिया। तहसीलदार और एसडीओ मुख्यालय में रहते नहीं और अब तक किसी एक भी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं की गई। इस मामले पर बावनकुले ने जिलाधिकारी से भी कहा कि आपका नियंत्रण नहीं है। ऐसा नहीं चलेगा। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में लापरवाही नहीं चलेगी और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
डीपीसी से 1200 करोड़ रुपये की मांग की जाएगी। इस प्रस्ताव को डीपीसी की बैठक में एकमत से मंजूरी दी गई। नियोजन विभाग ने जानकारी दी कि विविध विभागों से 1611 करोड़ रुपयों का प्रस्ताव आया है। बीते वर्ष 944 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। पालक मंत्री ने कहा कि इस बार 1200 करोड़ रुपयों की मांग डीपीसी की राज्य स्तरीय बैठक में करेंगे। कुछ विधायकों ने 1300 करोड़ रुपये मांग करने का सुझाव रखा।
