tanker water supply pla (सोर्सः सोशल मीडिया)
Maharashtra Water Scheme News: गर्मी धीरे-धीरे दस्तक दे रही है। इसे देखते हुए प्रशासन ने संभावित जल संकट से निपटने के लिए करोड़ों रुपये की कार्ययोजना को मंजूरी देकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। लेकिन इस योजना में जिले के खराब पड़े हैंडपंपों की मरम्मत के लिए एक भी रुपया निर्धारित नहीं किया गया है। इससे सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासन केवल टैंकर व्यवस्था को बढ़ावा देने पर ही ध्यान दे रहा है?
यवतमाल जिले का भौगोलिक विस्तार इतना बड़ा है कि कई बार अधिकारियों के लिए अंतिम छोर के गांव तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे दूरस्थ और दुर्गम गांवों में गर्मी के दिनों में गांव या घरों के आंगन में लगे हैंडपंप ही लोगों का मुख्य सहारा बनते हैं।
लेकिन नल-जल योजना लागू होने के बाद प्रशासन ने हैंडपंपों की ओर लगभग ध्यान देना बंद कर दिया है। जल संकट निवारण कार्ययोजना में भी हैंडपंपों की मरम्मत के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं किया जाता। इस वर्ष की योजना में प्रशासन ने केवल 25 बोरवेल के लिए 18 लाख 75 हजार रुपये का प्रावधान किया है।
जिले में कुल 8,563 अधिकृत हैंडपंप हैं, लेकिन उनमें से कितने चालू हैं और कितने खराब, इसका कोई वास्तविक सर्वेक्षण भी प्रशासन ने नहीं कराया है। गर्मी में सहारा बनने वाले इन हैंडपंपों की मरम्मत के लिए योजना में शून्य रुपये का प्रावधान रखा गया है।
कई गांवों के नागरिकों ने अपने यहां खराब पड़े हैंडपंपों की मरम्मत की मांग की थी। ग्राम पंचायतों के माध्यम से प्रस्ताव पंचायत समितियों तक भी भेजे गए थे, लेकिन जिला स्तर पर जब जल संकट निवारण योजना को मंजूरी दी गई, तब हैंडपंपों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
हर साल जल संकट निवारण के नाम पर प्रशासन करोड़ों रुपये खर्च करता है, जिसमें मुख्य रूप से गांव-गांव टैंकर से पानी पहुंचाने पर जोर दिया जाता है। इससे टैंकर व्यवस्था और मजबूत होती जा रही है, जबकि ग्रामीणों के हक के हैंडपंपों की मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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इस वर्ष जिला परिषद ने गर्मी की आहट मिलते ही 15 करोड़ 14 लाख 61 हजार रुपये की कार्ययोजना तैयार की है, जिसे जिलाधिकारी ने मंजूरी दे दी है। मार्च से जून तक 877 गांवों के लिए 1,040 उपाय योजनाएं प्रस्तावित की गई हैं। इनमें 619 गांवों के लिए 675 कुओं का अधिग्रहण और 91 टैंकरों की व्यवस्था पर अधिक जोर दिया गया है, जबकि हैंडपंपों के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है।