जलसंकट कार्ययोजना 15 करोड़ के पार, 1,040 उपाय प्रस्तावित, 877 गांवों में जलसंकट की आशंका

Jal Jeevan Mission Works: यवतमाल जिले में संभावित जल संकट से निपटने के लिए 15 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसमें 877 गांवों के लिए 1,040 उपाय प्रस्तावित किए गए हैं।
Rural water shortage Maharashtra
Yavatmal water crisis plan (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Yavatmal Water Crisis Plan: यवतमाल जिले में इस वर्ष वर्षा संतोषजनक रही और लगातार बारिश के कारण नदियों, नालों तथा विभिन्न जल परियोजनाओं में जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद जिला प्रशासन ने संभावित जल संकट को ध्यान में रखते हुए करीब 15 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की है।

इस योजना के अंतर्गत जनवरी से मार्च और अप्रैल से जून 2026 के दो चरणों में जलसंकट निवारण के उपाय किए जाएंगे। योजना के अनुसार जिले के 877 गांवों में संभावित जल संकट को देखते हुए प्रशासन ने 1,040 उपायों के लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाई है।

अनियमित वर्षा का सिलसिला जारी

पिछले कुछ वर्षों से जिले में अनियमित वर्षा का सिलसिला जारी है, जिसका असर गर्मियों में ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की भारी किल्लत के रूप में सामने आता है। इसे ध्यान में रखते हुए जिला परिषद के जल आपूर्ति विभाग ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। विभाग ने 15 करोड़ 14 लाख रुपये की जलसंकट निवारण कार्ययोजना तैयार कर इसे दो चरणों में विभाजित किया है। जनवरी से मार्च के लिए प्रस्तावित उपायों में बोरवेल कार्यक्रम के तहत 24 गांवों में 25 योजनाओं पर 18 लाख 75 हजार रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है। अस्थायी पूरक नल जल योजनाओं के लिए 6 गांवों में 6 योजनाओं पर 46 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। नल जल योजनाओं की विशेष मरम्मत के लिए 54 गांवों में 54 योजनाओं पर 5 करोड़ 70 लाख रुपये खर्च का प्रस्ताव है।

निजी कुओं का अधिग्रहण

इसके अलावा निजी कुओं के अधिग्रहण के तहत 171 गांवों में 184 कुओं पर 99 लाख 36 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे, जबकि टैंकर या बैलगाड़ी से जल आपूर्ति के लिए 20 गांवों में 20 टैंकरों पर 84 लाख रुपये खर्च का प्रस्ताव है। इस तरह कुल 256 गांवों में 290 उपायों के लिए 8 करोड़ 33 लाख 11 हजार रुपये खर्च करने की योजना बनाई गई है।

टैंकरमुक्ति पर सिर्फ चर्चाएं

जिले को टैंकरमुक्त करने को लेकर कई बार चर्चा हुई, लेकिन हर साल गर्मी शुरू होते ही पानी की समस्या फिर से गंभीर हो जाती है और अंततः टैंकरों से जल आपूर्ति करनी पड़ती है। इसके अलावा 790 गांवों के लिए 859 निजी कुओं के अधिग्रहण का भी प्रस्ताव है, जिसके लिए 4 करोड़ 63 लाख 86 हजार रुपये की आवश्यकता बताई गई है।

करोड़ों खर्च के बावजूद स्थिति जस की तस

जिले में हर वर्ष जलसंकट निवारण पर 9 से 10 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। जल जीवन मिशन और जिला खनिज विकास निधि से भी करोड़ों रुपये के कार्य किए जाते हैं। इसके बावजूद हर साल जलसंकटग्रस्त गांवों की संख्या बढ़ती जा रही है। इससे जल आपूर्ति विभाग की योजना और कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि स्थायी समाधान लागू करने के बजाय हर साल अस्थायी उपायों पर ही बड़ी रकम खर्च की जा रही है।

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