यवतमाल जिला बैंक चुनाव: जिले की DCCB वोटर लिस्ट पर शिकायतों का अंबार, क्या टल जाएगा चुनाव?

Yavatmal DCCB Election: यवतमाल जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक चुनाव की मतदाता सूची पर आपत्तियों की बौछार, सहकार क्षेत्र में मचा हड़कंप। भर्ती घोटाले और RBI नियमों ने फंसाया चुनाव।
Massive objections filed against Yavatmal District Cooperative Bank's draft voter list.
यवतमाल जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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District Cooperative Bank Voter List Objections: यवतमाल जिले की पहचान ‘किसानों की बैंक’ के रूप में रखने वाला जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक एक बार फिर चुनावी चर्चा के केंद्र में है। बैंक के संचालक मंडल का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, जिससे किसान, मतदाता और सहकार क्षेत्र से जुड़े राजनीतिक नेताओं की निगाहें आगामी चुनाव पर टिकी हुई हैं। हाल ही में इस प्रक्रिया के तहत जिला उपनिबंधक (द्वितीय) द्वारा प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की गई है।

हालांकि, इस सूची पर बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं, ऐसी विश्वसनीय जानकारी सामने आ रही है। किसानों की बैंक के रूप में प्रसिद्ध इस जिला मध्यवर्ती बैंक में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। कई शाखाओं में अधिकारियों और कर्मचारियों पर गबन के मामले भी हाल के दिनों में दर्ज हुए हैं।

हाई कोर्ट में याचिका दायर

इतना ही नहीं, कार्यकाल समाप्त होने के कगार पर पहुंचते ही वर्तमान संचालक मंडल ने हड़बड़ी में कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। इस भर्ती प्रक्रिया को यवतमाल विधानसभा क्षेत्र के विधायक बालासाहेब मांगुलकर ने मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में याचिका दायर कर चुनौती दी थी।

साथ ही, विधानसभा पटल पर भी इस भर्ती में हुए कथित घोटाले को उठाया गया, जिससे यह भर्ती प्रक्रिया विवादों में घिर गई। केवल परीक्षाएं लेकर भर्ती को फिलहाल रोक दिया गया है। वर्तमान में बैंक के संचालक मंडल का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, इसलिए उपनिबंधक द्वारा बैंक चुनाव की तैयारियां की जा रही हैं।

इसी क्रम में हाल ही में प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की गई, लेकिन इस पर आपत्तियों की बाढ़ आ गई है। ऐसे में संशोधित मतदाता सूची जारी होने की पूरी संभावना जताई जा रही है। इसका सीधा असर चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे सहकार क्षेत्र के दिग्गजों पर पड़ा है। संपर्क और प्रचार दोनों ही स्तरों पर वे असमंजस की स्थिति में फंसे हुए नजर आ रहे हैं।

दो बार संचालक रह चुके नेताओं पर गाज

रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया के निर्देशों के अनुसार कोई भी व्यक्ति दो बार से अधिक बैंक का संचालक नहीं बन सकता। इस आदेश के चलते वर्षों से संचालक पद पर जमे कई नेताओं को बड़ा झटका लगा है। इन नेताओं ने इस आदेश को ही मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में याचिका के माध्यम से चुनौती दी है। अभी तक इस याचिका पर फैसला नहीं आया है, जिससे बैंक चुनाव की प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है।

दो महीने का इंतज़ार तय

जिला बैंक चुनाव को लेकर सहकार विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने पर उन्होंने अनौपचारिक बातचीत में बताया कि अभी तक चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ है। साथ ही, जल्द ही जिला परिषद चुनाव की अधिसूचना आने की संभावना है। ऐसे में बैंक चुनाव कम से कम दो महीने देरी से होने की संभावना जताई जा रही है। परिणामस्वरूप, चुनाव की तैयारी कर रहे इच्छुक उम्मीदवारों को अभी दो महीने तक इंतजार करना पड़ सकता है।

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