loan distribution irregularities (सोर्सः सोशल मीडिया)
Yavatmal Financial Scandal: यवतमाल शहर की एक प्रतिष्ठित पतसंस्था से जुड़े कई गंभीर मामले अब धीरे-धीरे सामने आने लगे हैं। जानकारी के अनुसार महिला बचत समूहों को बड़े पैमाने पर बिना उचित जांच-पड़ताल के कर्ज वितरित किया गया। इन समूहों से कर्ज की वसूली संस्था से बाहर की एक महिला के माध्यम से कराई जाती थी।
हैरानी की बात यह है कि उस महिला ने लाखों रुपये की वसूली तो की, लेकिन वह रकम अब तक पतसंस्था के खाते में जमा नहीं कराई गई। इस घटना के कारण संस्था के एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) में लगातार वृद्धि हो रही है। बार-बार सामने आ रही अनियमितताओं के चलते संस्था के आर्थिक संकट में फंसने और भविष्य में बंद होने की आशंका भी जताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि आम लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए कई चक्कर लगाने पड़ते हैं, जबकि प्रभावशाली लोगों को लाखों रुपये के व्यक्तिगत कर्ज आसानी से दे दिए गए। कर्ज वितरण की तय सीमा को संचालक मंडल और शाखा प्रबंधक ने भी पार कर दिया। वहीं, वसूली के मामले में गठित दल की चुप्पी संस्था के भविष्य के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है।
सूत्रों के मुताबिक पतसंस्था द्वारा करीब सवा सौ करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज विभिन्न योजनाओं के तहत वितरित किया गया है। इनमें से अधिकांश बचत समूहों ने कर्ज की रकम वापस भी कर दी है, लेकिन बकाया राशि एक महिला को सौंप दी जाती थी। उसने वसूली के नाम पर अब तक लाखों रुपये एकत्र किए, लेकिन यह रकम संस्था के खाते में जमा नहीं की गई। इतना बड़ा आर्थिक नुकसान होने के बावजूद संस्था के अध्यक्ष, संचालक मंडल और प्रबंधक की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
इस मामले को निवेशकों के विश्वास को ठेस पहुंचाने वाला माना जा रहा है। संस्था के अधिकारियों ने संबंधित महिला से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वह रकम जमा करने के प्रति सकारात्मक नहीं दिख रही है। ऐसे में उसके खिलाफ पुलिस थाने में आपराधिक मामला दर्ज करना ही उचित कदम माना जा रहा है। हालांकि यह भी जानकारी सामने आई है कि संस्था के कुछ अधिकारी ही उस महिला को संरक्षण दे रहे हैं। इससे संचालक मंडल और प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
बताया जाता है कि पतसंस्था के प्रबंधक ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर आरडी कलेक्शन शुरू कराया है। इस कलेक्शन के जरिए तथा संस्था की राशि अन्य बैंकों में निवेश कराने के नाम पर लाखों रुपये का कमीशन कमाने का आरोप सामने आया है। इसकी जानकारी संचालक मंडल के साथ-साथ संस्था के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी होने की बात कही जा रही है, लेकिन सभी ने इस पर चुप्पी साध रखी है।