Yavatmal News: आदिवासी विद्यार्थियों के ‘नामांकित’ स्कूलों पर सवाल, प्रवेश तीन महीने लेट
Adivasi School Admission Delay: यवतमाल में आदिवासी छात्रों के नामांकित स्कूलों में प्रवेश तीन महीने देर से शुरू हुआ, जिससे संगठनों ने सरकार पर योजना बंद करने के आरोप लगाए।
- Written By: आंचल लोखंडे
आदिवासी विद्यार्थियों के ‘नामांकित’ स्कूलों पर सवाल (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Adivasi School Admission Delay: आदिवासी छात्रों को नामांकित अंग्रेज़ी स्कूलों में निशुल्क शिक्षा देने की योजना 2009 से लागू है। लेकिन इस वर्ष शैक्षणिक सत्र शुरू होने के पूरे तीन महीने बाद, यानी 29 अगस्त को शासन निर्णय जारी कर प्रवेश दिए गए। इसी कारण आदिवासी संगठनों की ओर से यह सवाल उठाया जा रहा है कि कहीं सरकार इन नामांकित स्कूलों की योजना बंद करने का प्रयास तो नहीं कर रही? विशेष बात यह है कि जिस आदिवासी विकास विभाग के माध्यम से यह योजना चलाई जाती है, उसी विभाग के कैबिनेट मंत्री यवतमाल जिले के हैं।
डॉ. अशोक उईके के मंत्रालय से ही यह पूरा कामकाज देखा जाता है। इसके बावजूद जिले के आदिवासी छात्रों को इस वर्ष प्रवेश के लिए तीन महीने इंतज़ार करना पड़ा। यवतमाल जिले में पांढरकवड़ा और पुसद में आदिवासी विकास प्रकल्प कार्यालय हैं। इनके माध्यम से स्कूलों का चयन किया जाता है और छात्रों को नामांकित स्कूलों में भेजा जाता है।
कैबिनेट मंत्री होने का लाभ क्या?
लेकिन इस बार अगस्त तक भी प्रवेश प्रक्रिया शुरू न होने के कारण विभिन्न आदिवासी संगठनों ने मोर्चे निकालकर तीव्र विरोध जताया। नागपुर स्थित अपर आदिवासी आयुक्त कार्यालय पर हुए आंदोलन के बाद ही 29 अगस्त को शासन निर्णय जारी किया गया। इतनी देर के बाद निर्णय जारी होने पर आदिवासी संगठनों ने आरोप लगाया कि सरकार नामांकित स्कूल योजना बंद करने का गुप्त प्रयास कर रही है।
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क्या ये स्कूल वास्तव में ‘नामांकित’ हैं?
मांग उठ रही है कि शासन हर वर्ष नए सिरे से मंजूरी देने के बजाय एक बार में 5-10 वर्षों के लिए स्कूलों का चयन करे। साथ ही जिन स्कूलों का चयन किया गया है, उनमें से कई स्कूल विभिन्न राजनीतिक दलों के वर्तमान और पूर्व विधायक, सांसद तथा अन्य जनप्रतिनिधियों से जुड़े व्यक्तियों द्वारा संचालित हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आदिवासी विकास विभाग ने इन स्कूलों का चयन किन मानदंडों के आधार पर किया। यह स्पष्ट नहीं है।
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आदिवासी छात्रों के वंचित होने का खतरा
ऑल इंडिया आदिवासी एम्प्लॉइज़ फेडरेशन के केंद्रीय अध्यक्ष प्रा. मधुकर उईके ने कहा कि आदिवासी छात्र नामांकित स्कूल प्रवेश योजना 2009 से कार्यान्वित है। लेकिन इस वर्ष सरकार ने इसे बंद करने का प्रयास किया। सरकार आदिवासी छात्रों को अंग्रेज़ी माध्यम से शिक्षा लेने से वंचित करने की कोशिश कर रही है, जिससे आदिवासी समाज के बच्चों के उच्च शिक्षा के अवसर प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।
