यवतमाल से 6 महीने में 34 आदिवासी लड़कियां लापता, ‘लव जिहाद’ के एंगल से जांच शुरू
Yavatmal Girls Missing Case: महाराष्ट्र के यवतमाल में 6 महीने में 34 आदिवासी लड़कियां लापता। मानव तस्करी और वेश्यावृत्ति का आरोप। मंत्री अशोक उइके ने दिए सख्त जांच के आदेश।
- Written By: अनिल सिंह
Yavatmal Tribal Girls Missing Case (प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स-AI)
Yavatmal Tribal Girls Missing Case: महाराष्ट्र के यवतमाल जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। जिले के रालेगांव तालुका में पिछले छह महीनों के भीतर 34 आदिवासी लड़कियों के लापता होने की सनसनीखेज जानकारी सामने आई है। इस मामले ने तब और भी गंभीर मोड़ ले लिया जब भाजपा जिला अध्यक्ष प्रफुल चव्हाण ने आरोप लगाया कि इन लड़कियों को वेश्यावृत्ति के लिए विदेशों में बेचा जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोक उइके ने पुलिस अधीक्षक को तत्काल जांच के आदेश दिए हैं।
इस पूरे प्रकरण में एक कथित ऑडियो क्लिप भी वायरल हो रही है, जिसमें एक शख्स और महिला के बीच मानव तस्करी के तौर-तरीकों पर चर्चा हो रही है। क्लिप में ‘मजहर कुरैशी’ नामक व्यक्ति को मुख्य आरोपी बताया जा रहा है। बातचीत से संकेत मिलते हैं कि यह एक सुनियोजित गिरोह है जो लड़कियों को नौकरी या शादी का झांसा देकर पुणे और फिर वहां से अन्य स्थानों पर तस्करी करता है। दावा किया जा रहा है कि इस काम में कल्याणी नामक एक महिला और गिरोह के अन्य सदस्य शामिल हैं, जो मोबाइल के जरिए अपना जाल फैलाते हैं।
विदेशी तस्करी और वेश्यावृत्ति का गंभीर आरोप
भाजपा जिला अध्यक्ष प्रफुल चव्हाण ने गृह विभाग को दी गई अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि यह केवल गुमशुदगी का मामला नहीं है, बल्कि एक संगठित ह्यूमन ट्रैफिकिंग सिंडिकेट है। चव्हाण के अनुसार, गरीब आदिवासी परिवारों की नाबालिग बेटियों को पैसों का लालच देकर उनके माता-पिता को भी गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने इस मामले में ‘लव जिहाद’ और धर्मांतरण की संभावनाओं की भी जांच करने की मांग की है। आरोप है कि लड़कियों को तस्करी कर विदेशों में वेश्यावृत्ति के दलदल में धकेला जा रहा है।
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पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
इस मामले में यवतमाल पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी उंगलियां उठी हैं। बताया जा रहा है कि एक संदिग्ध को पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था, लेकिन बाद में उसे रिहा कर दिया गया। रिहा होते ही आरोपी तेलंगाना भागने की फिराक में था, जिसे दोबारा पकड़ा गया। मंत्री अशोक उइके ने इस पर नाराजगी जताते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से मुलाकात की और उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है जो अनजाने में या जानबूझकर इन आरोपियों की मदद कर रहे हैं।
जातीय आधार और गहन जांच के निर्देश
आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोक उइके ने उपमंडल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इस मामले को जातिगत आधार (Caste-based angle) पर प्राथमिकता दें। चूंकि पीड़ित लड़कियां समाज के सबसे वंचित वर्ग से आती हैं, इसलिए इस मामले में जल्द से जल्द एफआईआर दर्ज कर कड़े कदम उठाने को कहा गया है। फिलहाल, यवतमाल जिले में इस खुलासे के बाद भारी आक्रोश है और नागरिक प्रशासन से उन 34 लापता लड़कियों की तत्काल बरामदगी की मांग कर रहे हैं जो पिछले छह महीनों से अपने घरों से लापता हैं।
