खूनी क्लर्क को मिली उम्रकैद! गबन छिपाने के लिए चालक का गला रेता, सीमेंट के साथ कुएं में फेंकी थी लाश

MSRTC Clerk Murder Case: 8 लाख के गबन का राज खुलने पर सेवानिवृत्त बस चालक मुजीब खान की हत्या करने वाले क्लर्क काजी अतिकउद्दीन को उम्रकैद। सिर काटकर कुएं में फेंका था शव।
Murderous Clerk Sentenced to Life Imprisonment! Slits Driver's Throat to Cover Up Embezzlement; Body Dumped in Well with Cement
न्यायालय के निर्णय की प्रतीकात्मक फोटो (सार्स: सोशल मीडिया)
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MSRTC Clerk Murder Case Sambhajinagar: 8 लाख रुपये के गबन का राज खुलने और पैसे वापस करने के दबाव से बचने के लिए एक सेवानिवृत्त बस चालक की जघन्य हत्या करने वाले आरोपी लिपिक को जिला एवं सत्र न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश निखिल पी. मेहता ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अपराधी पर 5.15 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

क्या था पूरा मामला?

मृतक मुजीब अहमद खान (59) महाराष्ट्र राज्य परिवहन निगम (MSRTC) में बस चालक थे और जनवरी 2020 में सेवानिवृत्त हुए थे। आरोपी काजी अतिकउद्दीन अमीरउद्दीन (36) विभागीय नियंत्रक कार्यालय में भविष्य निर्वाह निधि (PF) और पेंशन का काम देखता था। जांच में सामने आया कि काजी ने 2017 में मुजीब खान के खाते से धोखाधड़ी कर 8 लाख रुपये निकाल लिए थे। राज खुलने पर आरोपी ने 4 लाख रुपये तो लौटा दिए, लेकिन बाकी 4 लाख रुपये के लिए मुजीब खान लगातार दबाव बना रहे थे। इसी दबाव से छुटकारा पाने के लिए काजी ने हत्या की खौफनाक साजिश रची।

साजिश और दरिंदगी: सिर काटकर कुएं में फेंका

9 जुलाई 2020 को आरोपी ने कागजी कार्रवाई के बहाने मुजीब खान को कार्यालय बुलाया और फिर उन्हें कार में बैठाकर ले गया। एक परिचित के घर ले जाकर आरोपी ने चाकू और कुल्हाड़ी से हमला कर मुजीब खान का गला रेत दिया। हत्या के बाद आरोपी ने सिर और धड़ को अलग कर दिया। शव के टुकड़ों को बोरी में भरकर, उसमें सीमेंट डाला और समर्थ नगर स्थित एक कुएं में फेंक दिया ताकि शव ऊपर न आ सके।

पुलिस जांच और अदालती फैसला

मुजीब खान के लापता होने के बाद क्रांति चौक पुलिस ने जांच शुरू की। संदेह के आधार पर जब काजी से पूछताछ हुई, तो कत्ल की यह खौफनाक दास्तान सामने आई। तत्कालीन पुलिस निरीक्षक अमोल देवकर ने पुख्ता सबूत जुटाकर चार्जशीट दाखिल की।

सहायक लोक अभियोजक अनिल हिवराले ने अदालत में गवाहों और सबूतों को इस तरह पेश किया कि आरोपी का बचना नामुमकिन हो गया। अदालत ने आरोपी काजी अतिकउद्दीन को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई, जबकि एक अन्य आरोपी अफरोज खान को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।

अपराधियों के लिए कड़ा संदेश

यह मामला न केवल एक वित्तीय धोखाधड़ी था, बल्कि विश्वासघात और क्रूरता की पराकाष्ठा थी। एक सरकारी कर्मचारी द्वारा अपने ही विभाग के सेवानिवृत्त सहकर्मी की इस तरह हत्या करना समाज और व्यवस्था के लिए एक बड़ा कलंक है। छत्रपति संभाजीनगर जिला एवं सत्र न्यायालय का यह सख्त फैसला उन लोगों के लिए एक चेतावनी है जो कानून की आंखों में धूल झोंकने और अपराध के जरिए सच को दबाने की कोशिश करते हैं। मुजीब खान के परिवार के लिए यह न्याय उनके लंबे इंतजार का अंत है।

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