टिपेश्वर अभयारण्य में शिकार को लेकर भिड़े बाघिन और तेंदुआ, “डेज़ी” बाघिन के हमले में 4 वर्षीय तेंदुए की मौत
Maharashtra Tipeshwar Wildlife Sanctuary: टिपेश्वर अभयारण्य में शिकार पर कब्जे को लेकर "डेज़ी" (टी-44) बाघिन और तेंदुए में संघर्ष हो गया। इस लड़ाई में चार वर्षीय तेंदुए की मौत हो गई।
- Written By: रूपम सिंह
तेंदुआ (सोर्स- नवभारत)
Maharashtra Wildlife News: टिपेश्वर अभयारण्य में बाघिन और तेंदुए के बीच हुए संघर्ष में लगभग चार वर्षीय तेंदुए की मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर अभयारण्य में वन्यजीवों के बीच शिकार को लेकर होने वाले संघर्ष को उजागर किया है। यह घटना अभयारण्य के पारवा वन परिक्षेत्र के माथनी वृत्त अंतर्गत बोथ बीट के कक्ष क्रमांक 138 में घटित हुई। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि बाघिन और तेंदुए के बीच हुए प्राकृतिक संघर्ष में तेंदुए की मृत्यु हुई है।
वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, टी-44 नंबर की बाधिन जिसे पर्यटकों के बीच “डेज़ी” के नाम से जाना जाता है। उसने एक हिरण का शिकार किया था। इसी शिकार पर एक तेंदुए ने कब्जा करने का प्रयास किया। इस दौरान बाघिन और तेंदुआ आमने-सामने आ गए और दोनों के बीच जबरदस्त संघर्ष हुआ। संघर्ष के दौरान बाघिन ने तेंदुए पर हमला कर उसे मार डाला। संघर्ष के बाद बाघिन तेंदुए के शव को तालाब के समीप पहाड़ी ढलान पर स्थित बांस की झाड़ियों के नीचे ले गई थी।
नियमित गश्त के दौरान वन मजदूरों की नजर इस पर पड़ी।उन्होंने तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम घटनास्थल पर पहुंची। डॉ. रणजीत नाले के नेतृत्व में डॉ. पायघन और डॉ. कालमेघ ने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूर्ण की।
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यह पूरी कार्रवाई टिपेश्वर के सहायक वन संरक्षक उदय आव्हाड, वन परिक्षेत्र अधिकारी प्रशांत सोनुले, पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. रणजीत नाले, मानद वन्यजीव रक्षक रमजान विरानी तथा निसर्ग मित्र मंच के अध्यक्ष सुबोध कालपांडे की उपस्थिति में की गई। वनपाल शशांक सोनटक्के, चंद्रकांत हेमके, वनरक्षक दिगंबर पोटे, स्मिता बेलेकर आदि उपस्थित थे। उक्त संपूर्ण कार्रवाई विभागीय वन अधिकारी उत्तम फड के मार्गदर्शन में की गई।
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तेंदुए के शव को सुरक्षित बाहर निकाला
क्षेत्र दुर्गम होने के कारण वहीं पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार करना संभव नहीं था। इसलिए तेंदुए के शव को सुरक्षित बाहर लाया गया। इसके बाद पशु चिकित्सकों की मौजूदगी में पोस्टमार्टम किया गया। जांच में तेंदुए के शरीर पर कई स्थानों पर पंजों और दांतों के गहरे घाव पाए गए। तेंदुए के आवश्यक नमूने और कुछ महत्वपूर्ण अंग सुरक्षित रखे गए हैं। सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद शव का अंतिम संस्कार किया गया।
