विधायक किसनराव वानखेडे (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Kisanrao Wankhede MLA: महाराष्ट्र विधानसभा के बजट में अनुदान की मांगों पर हुई चर्चा के दौरान उमरखेड-महागांव विधानसभा क्षेत्र की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं और विकास कार्यों के मुद्दों को उठाते हुए विधायक किसनराव वानखेडे ने सदन का ध्यान आकर्षित किया।
विधायक वानखेडे ने उमरखेड–महागांव विधानसभा क्षेत्र में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए नए उद्योग-व्यवसाय स्थापित करने हेतु कम से कम 1000 करोड़ रुपये के विशेष निधि की व्यवस्था करने की मांग सरकार से की। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
विधायक वानखेडे ने कहा कि महागांव में वर्तमान में पुलिस स्टेशन की इमारत और पुलिस कर्मियों के लिए आवासीय सुविधा की आवश्यकता है। इसलिए यहां नए पुलिस स्टेशन भवन और पुलिस कॉलोनी के निर्माण के लिए आवश्यक निधि उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने रबी सीजन के गेहूं और चना फसल के लिए क्रॉप सर्वे ऐप पर पंजीकरण की अवधि समाप्त होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि कई किसान पंजीकरण से वंचित रह गए हैं, इसलिए किसानों के हित में इस ऐप पर पंजीकरण की समय सीमा बढ़ाई जानी चाहिए।
इसके अलावा उन्होंने ईसापुर बाएं नहर (लेफ्ट कैनाल) के 0 से 15 किलोमीटर तक क्षेत्र में मरम्मत और निर्माण कार्य के लिए निधि उपलब्ध होने की जानकारी दी, लेकिन 16 से 54 किलोमीटर तक की नहर अत्यंत जर्जर अवस्था में है। इस हिस्से की तत्काल मरम्मत के लिए अतिरिक्त निधि उपलब्ध कराने की मांग भी उन्होंने की।
विधायक वानखेडे ने कहा कि बढ़ती गर्मी के कारण पैनगंगा नदी लगभग सूख चुकी है, जिससे वन्यप्राणियों, पशुधन और नदी किनारे बसे गांवों को पीने के पानी की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए पैनगंगा नदी में आवश्यक मात्रा में पानी छोड़ने की तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए।
यह भी पढ़ें – नागपुर मनपा बजट में बड़ा फेरबदल! प्रोफेशनल टैक्स और संपत्ति ऑडिट से बढ़ेगी आय, अब बनेगा नया मास्टरप्लान
उन्होंने यह भी बताया कि देवसरी, दिघड़ी, उंचवडद, चातारी और बोरी गांवों के किसानों को पिछले वर्ष नहर खराब होने के कारण खेतों तक सिंचाई का पानी नहीं मिल पाया था। इसलिए नहरें मरम्मत कर ईसापुर बाएं नहर और नदी पात्र में पानी छोड़ने की उचित योजना बनाई जाए, ताकि वन्यप्राणी, पशु-पक्षी, पशुधन और नदी किनारे के गांवों को पीने का पानी तथा किसानों को समय पर सिंचाई का पानी मिल सके और किसानों की फसल सुरक्षित रह सके।