अतिवृष्टि बनी वरदान, रबी बुवाई ने तोड़ा रिकॉर्ड; जलस्रोत भरे, रबी किसानों के चेहरे खिले

Yavatmal Crop Statistics: औसत से अधिक वर्षा से अमरावती संभाग में रबी बुवाई 114% तक पहुंची। गेहूं का रकबा 134% बढ़ा, जबकि चना लगभग स्थिर रहा। जलस्रोतों के भरने से किसानों को राहत मिली।
Heavy rainfall proved a blessing, Rabi sowing broke records; water sources filled, and Rabi farmers' faces brightened.
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Yavatmal Rabi Crop Area: यवतमाल इस वर्ष औसत से अधिक हुई वर्षा ने जहां खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचाया, वहीं यही बारिश रबी सीजन के लिए वरदान साबित हुई है। अमरावती संभाग के पांचों जिलों में रबी सीजन के लिए औसतन 9.13 लाख हेक्टेयर क्षेत्र प्रस्तावित था, लेकिन वर्तमान में 10.44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हो चुकी है।

यह लक्ष्य का 114.36 प्रतिशत है। इस वर्ष गेहूं के रकबे में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। लगातार वर्षा और अतिवृष्टि के कारण जलस्रोतों का पुनर्भरण हुआ है तथा जमीन में नमी बढ़ी है, जो वर्षा आधारित चने की फसल के लिए अनुकूल साबित हुई है। साथ ही भूजल स्तर में वृद्धि होने से गेहूं की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध है।

ऐसी स्थिति में गेहूं का औसत रकबा 2.25 लाख हेक्टेयर के मुकाबले बढ़कर 3.03 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो 134.54 प्रतिशत है। वहीं चने का औसत क्षेत्र 6.39 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 6.26 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है, जो 97.98 प्रतिशत है।

इन दोनों फसलों का कुल रबी क्षेत्र में लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा है। हालांकि तिलहनी फसलों के क्षेत्र में इस बार उल्लेखनीय कमी आई है। चालू रबी सीजन में रबी ज्वार 17,066 हेक्टेयर, गेहूं 3,02,789 हेक्टेयर, मक्का 43,590 हेक्टेयर, चना 6,26,606 हेक्टेयर, सनफ्लावर 1,330 हेक्टेयर, अलसी 29.60 हेक्टेयर, तिल 376.60 हेक्टेयर, सूरजमुखी 59 हेक्टेयर, सरसों 257.40 हेक्टेयर तथा चिया सीड 9,083 हेक्टेयर में बुवाई की गई है।

जिलावार बुवाई (हेक्टेयर में)

क्रमांक जिला बुवाई क्षेत्र (हेक्टेयर) प्रतिशत (%)
1 अमरावती 1,85,224 109.23%
2 अमरावती (अतिरिक्त) 2,05,771 112.52%
3 अकोला 1,51,468 118.59%
4 वाशीम 1,29,151 108.74%
5 बुलढाणा 3,89,740 118.17%

सभी जिलों में सालाना औसत से ज्यादा हुई वर्षा

खरीफ सीजन में सभी जिलों में औसत से अधिक वर्षा हुई थी। अक्टूबर तक रुक-रुक कर बारिश जारी रही। अतिवृष्टि के कारण खेतों में पानी भर गया और फसलों को भारी नुकसान हुआ, जिससे औसत उत्पादन में कमी आई। इसी नुकसान की भरपाई के लिए किसानों ने इस बार रबी सीजन में बड़े पैमाने पर बुवाई की है।

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