प्राचीन स्मारकों के पास अवैध खनन बदस्तूर जारी, खुले में लावारिस पड़ी हैं अनमोल मूर्तियां
Bhatala Heritage Site: चंद्रपुर के भटाला ऐतिहासिक स्थल के पास अवैध खनन पर हाई कोर्ट सख्त, प्रशासन और पुरातत्व विभाग की लापरवाही उजागर, संरक्षण के निर्देश जारी किए है।
Bhatala heritage (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Illegal Mining Chandrapur: चंद्रपुर जिले के ऐतिहासिक विरासत स्थल भटाला वर्तमान में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। पुरातत्व विभाग की अक्षम्य लापरवाही और धड़ल्ले से हो रहे अवैध खनन के कारण इस प्राचीन धरोहर को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इस संदर्भ में हाई कोर्ट ने स्वयं संज्ञान लेते हुए इस मामले को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया।
याचिका पर बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि हाल ही में हुए एक संयुक्त निरीक्षण की रिपोर्ट ने प्रशासन और पुरातत्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं जिसमें पता चला है कि संरक्षित ऐतिहासिक स्थलों के एकदम करीब बेखौफ होकर खुदाई की जा रही है।
संरक्षित क्षेत्रों में चल रही है खुदाई
अदालत के समक्ष पेश की गई निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे नंबर 44 में ऋषि झील जो कि एक संरक्षित पुरातात्विक स्थल है से महज 220 मीटर की दूरी पर भारी खुदाई की गई है। सबसे अधिक चौंकाने वाला तथ्य यह है कि सर्वे नंबर 36 के कुछ हिस्सों के भीतर भी खनन गतिविधियां पाई गई हैं जो कि एक पूर्णतः संरक्षित क्षेत्र है और जहां कई महत्वपूर्ण स्मारक स्थित हैं।
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पुरातत्व विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर
इस खतरनाक स्थिति को देखते हुए न्यायाधीश अनिल किल्लोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने भूमि अभिलेख अधीक्षक को इन दोनों सर्वे नंबरों का विस्तृत सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया है, ताकि अवैध खुदाई के सटीक क्षेत्र का आकलन किया जा सके।
7 करोड़ खर्च, फिर भी दर्जनों मूर्तियां भगवान भरोसे
मामले की सुनवाई के दौरान पुरातत्व विभाग की एक बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। महाराष्ट्र प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम के तहत राज्य सरकार ने महादेव मंदिर सहित केवल 3 स्मारकों को संरक्षित घोषित किया है और इनके संरक्षण पर 7 करोड़ रुपये खर्च करने का दावा किया है लेकिन अदालत मित्र भानुदास कुलकर्णी ने अदालत को बताया कि इन 3 स्मारकों के अलावा भी पूरे क्षेत्र में लगभग 30 बड़ी ऐतिहासिक मूर्तियां और 98 छोटी मूर्तियां खुले आसमान के नीचे बिना किसी देखभाल के बिखरी पड़ी हैं। एक स्थानीय स्कूल के प्रवेश द्वार पर लक्ष्मी और हाथियों वाली नक्काशी भी पाई गई है जो इस क्षेत्र के समृद्ध इतिहास को दर्शाती है लेकिन इन पर पुरातत्व विभाग का कोई ध्यान नहीं है।
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कलेक्टर को खनन रोकने और कार्रवाई के सख्त निर्देश
इस घोर लापरवाही को देखते हुए अदालत ने सख्त निर्देश जारी किए। कलेक्टर को निर्देश दिया गया है कि वे उस क्षेत्र में आगे किसी भी प्रकार की खुदाई पर तत्काल रोक लगाएं। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि वहां खनन की कोई पूर्व अनुमति दी गई है तो स्मारकों के महत्व को देखते हुए उस पर तुरंत पुनर्विचार किया जाए। अदालत ने प्रशासन से यह भी उम्मीद जताई है कि वह अवैध खुदाई करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करेगा और बिखरी हुई अनमोल मूर्तियों के संरक्षण की चिंता का भी समाधान करेगा।
