Yavatmal MGNREGA update (सोर्सः सोशल मीडिया)
Yavatmal Workers Strike: वीबी जी राम जी (मनरेगा) के अंतर्गत कार्यरत संविदा कर्मचारी और अधिकारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर काम बंद आंदोलन शुरू कर दिया है। इसके चलते जिले में मनरेगा के तहत चल रहे विकास कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं। आंदोलनकारी कर्मचारियों की प्रमुख मांग है कि मनरेगा के अंतर्गत कार्यरत सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को अन्य संविदा कर्मचारियों की तरह शासकीय सेवा में समाहित किया जाए।
साथ ही, मनरेगा अंतर्गत अधिकारियों और कर्मचारियों की किसी निजी कंपनी के माध्यम से की जाने वाली भर्ती प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाए। कर्मचारियों का कहना है कि राज्य निधि एसोसिएशन के माध्यम से नियुक्ति देकर “समान काम, समान वेतन” नीति लागू की जाए। इसके अलावा, अन्य विभागों की तरह मनरेगा विभाग की स्वतंत्र यंत्रणा तैयार कर पदानुसार आकृतिबंध (स्ट्रक्चर) बनाया जाए।
वीबी जी राम जी के संविदा कर्मचारी और अधिकारी 1 फरवरी से मुंबई के आजाद मैदान में श्रृंखलाबद्ध अनशन और अन्नत्याग आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन को छह से सात दिन बीत जाने के बाद भी कोई ठोस समाधान नहीं निकला है, जिससे जिले में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
राज्य के विभिन्न जिलों में मनरेगा के अंतर्गत राज्य समन्वयक, तकनीकी सहायक, सहायक कार्यक्रम अधिकारी, क्लर्क-कम-डाटा ऑपरेटर और चपरासी आदि कर्मचारी संविदा पद्धति से कार्य कर रहे हैं। कर्मचारियों ने सवाल उठाया है कि जब राज्य सरकार अन्य विभागों के संविदा कर्मचारियों को शासकीय सेवा में समाहित कर रही है, तो वीबी जी राम जी में कार्यरत कर्मचारियों के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है।
मुंबई के आजाद मैदान में विभिन्न जिलों से पहुंचे कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर एकजुट होकर आंदोलन कर रहे हैं। 23 से 26 जनवरी तक काली पट्टी बांधकर लेखनी बंद आंदोलन किया गया। 27 से 31 जनवरी तक पूर्ण काम बंद आंदोलन हुआ। 2 से 5 फरवरी तक आजाद मैदान में धरना दिया गया और 6 फरवरी से अन्नत्याग आंदोलन शुरू किया गया है।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि मांगें पूरी होने तक वे पीछे नहीं हटेंगे। इस आंदोलन का असर ग्रामीण क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। मनरेगा की ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया, मस्टर रोल तैयार करना, भुगतान प्रक्रिया और अन्य प्रबंधन कार्य बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
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यवतमाल जिले में मनरेगा के अंतर्गत पिछले 15 दिनों से लगभग 70,156 कार्य लंबित पड़े हैं। इनमें सिंचन कुएं, पशु शेड, पगडंडी सड़कें, घरकुल और वृक्षारोपण जैसे कार्य शामिल हैं। वर्तमान समय काम का मुख्य सीजन होने के कारण ग्रामीण विकास की इस महत्वपूर्ण योजना पर गंभीर असर पड़ा है। कर्मचारियों की हड़ताल से ग्रामीण विकास की रीढ़ मानी जाने वाली यह योजना लगभग ठप हो गई है।
यवतमाल के विधायक बालासाहेब मांगुलकर ने मुंबई के आजाद मैदान पहुंचकर आंदोलनकारियों से मुलाकात की। उन्होंने कर्मचारियों की मांगों को विधानसभा अधिवेशन में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से उठाने का आश्वासन दिया है।