यवतमाल में झमाझम बारिश से किसानों को राहत, सोयाबीन-कपास की फसलों में लौटी जान, डैम मे भी पानी का स्तर बढ़ा
Soybean Cotton Farmers Relief: यवतमाल के उमरखेड़ में जुलाई के अंत की जोरदार बारिश से सोयाबीन, कपास समेत खरीफ फसलों को नया जीवन मिला। इसापुर बांध में पानी का स्तर बढ़ने से सिंचाई और जल संकट भी हुआ कम।
- Written By: आलोक उमाकृष्ण
बारिश से किसानों को राहत (सोर्स: AI)
Soybean Cotton Farmers Relief In Monsoon: यवतमाल जिले के उमरखेड़ तहसील में किसानों के लिए जुलाई के अंतिम सप्ताह में हुई जोरदार बारिश किसी वरदान से कम नहीं रही। जून माह और जुलाई के मध्य तक पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण किसान गंभीर चिंता में थे।
बारिश की कमी से खरीफ सीजन की सोयाबीन, कपास, गन्ना और हल्दी जैसी प्रमुख फसलें सूखने लगी थीं, जिससे किसानों के सामने दोबारा बुवाई का संकट खड़ा हो गया था। लेकिन जुलाई के आखिरी सप्ताह में मौसम ने करवट ली और लगातार हुई अच्छी बारिश ने खेतों में नई जान फूंक दी। बांदी और मथखंड क्षेत्र सहित तहसील के कई गांवों में खेत अब फिर से हरियाली से भर गए हैं।
सिंचाई व्यवस्था को मिलेगी मजबूती
लगातार हुई बारिश का असर केवल खेतों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसापुर बांध और उसके कैचमेंट क्षेत्र में भी पानी की बचत में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। बांध में पानी का स्तर बढ़ने से उमरखेड़ तहसील और आसपास के क्षेत्रों में सिंचाई व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही आने वाले महीनों में पीने का पानी का संकट की आशंका भी काफी हद तक कम हो गई है।
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कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगस्त में भी सामान्य वर्षा जारी रहती है, तो खरीफ फसलों की उत्पादकता बेहतर रहने की संभावना है। समय पर पानी उपलब्ध होने से बागायती खेती करने वाले किसानों को भी राहत मिलेगी और कृषि कार्यों में तेजी आएगी।
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बारिश से बढ़ा पानी का स्तर
कुओं और बोरवेल में पानी का स्तर बढ़ने से किसानों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी राहत मिली है। पिछले कुछ सप्ताह तक बारिश नहीं होने के कारण भविष्य को लेकर चिंतित किसान अब आगामी सीजन को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं। स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि मौसम इसी तरह अनुकूल बना रहा, तो इस वर्ष फसलों का उत्पादन बेहतर होगा और आर्थिक स्थिति में भी सुधार आएगा।
प्रशासन और कृषि विभाग ने भी किसानों को खेतों में जल निकासी और फसल प्रबंधन पर ध्यान देने की सलाह दी है, ताकि अत्यधिक वर्षा की स्थिति में नुकसान से बचा जा सके। फिलहाल संतोषजनक बारिश ने पूरे उमरखेड़ क्षेत्र में नई उम्मीद जगा दी है और खेती-किसानी की रफ्तार फिर से पटरी पर लौटती दिखाई दे रही है।
