गांव व शहर में राजनीतिक माहौल गर्माया, अब ‘गलती कर दी’ कहकर घूम रहे मतदाता
Local Body Elections: स्थानीय स्वराज्य चुनावों की घोषणा के बाद गांव और शहरों में राजनीतिक माहौल गरमाया। मतदाता अब पिछली गलती पर अफसोस जता रहे हैं।
- Written By: आंचल लोखंडे
गांव व शहर में राजनीतिक माहौल गर्माया (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Yavatmal News: स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनाव की घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। इसके साथ महाराष्ट्र में नए स्थानों, इमारतों और अन्य चुनाव संबंधी नियम भी प्रभावी हो गए हैं। इस बीच ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में राजनीतिक माहौल पूरी तरह से गर्मा गया है।
कई मतदाता अब यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि उन्होंने पिछली बार नेताओं के बहकावे में आकर गलती कर दी। इस बार मतदान का अवसर न मिलने से वे निराश हैं। गांवों में सरपंच पद को लेकर गहमागहमी तेज है और मतदाता अब ऐसे कद्दावर उम्मीदवारों की तलाश में हैं जो उन्हें बेहतर नेतृत्व का भरोसा दे सकें।
नागरिकों के बीच स्थानीय चुनावों को लेकर चर्चा
जैसी तीखी बहस विधानसभा में महंगाई को लेकर होती है, वैसी ही चर्चा अब नागरिकों के बीच स्थानीय चुनावों को लेकर देखी जा रही है। जो लोग पहले राजनीति से दूरी बनाए हुए थे, वे भी अब नेताओं के समर्थन में सक्रिय नज़र आ रहे हैं। नागरिकों में यह चर्चा भी है कि कई नेता, जो युवावस्था में कोई विशेष उपलब्धि हासिल नहीं कर पाए, अब सत्ता के लालच में जनता के बीच बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं। जिन मतदाताओं ने पहले इन नेताओं को सत्ता तक पहुंचाया था, वे अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
सम्बंधित ख़बरें
उल्हासनगर में नाम बदलकर हिंदू लड़की से शादी; बिहार ले जाकर हिजाब पहनने और गोमांस खाने के लिए किया मजबूर
ट्रैफिक पर टूटा सीपी ओला का हंटर, दुकानदारों और वाहन चालकों को सख्त हिदायत
सूरज का कहर जारी, भंडारा जिले का तापमान 43 डिग्री पर स्थिर, जलसंकट और बिजली कटौती बढ़ी
मीरा-भाईंदर में प्रदर्शन के दौरान बड़ा हादसा, महिला सफाईकर्मी गंभीर रूप से घायल
ये भी पढ़े: वक्फ उम्मीद पोर्टल प्रशिक्षण कार्यशाला को अकोला में मिला उत्साहजनक प्रतिसाद
नेता और मतदाताओं के व्यवहार में आया बदलाव
चुनाव जीतने के बाद कई नेता खुद को भगवान समझने लगे हैं, जबकि आम जनता उनके व्यवहार से असंतुष्ट है। यही नेता अब उन्हीं मतदाताओं से यह कहकर सवाल कर रहे हैं कि, “तुमने मुझे वोट क्यों नहीं दिया?” इस पर नागरिकों में असंतोष और चर्चाओं का दौर जारी है। आज हालात ऐसे हैं कि अस्पताल में काम करने वाला व्यक्ति भी, जिसकी कार्यशैली बेहद धीमी है, वह भी अपनी तारीफ करने से नहीं चूक रहा है।
