वर्धा में सरपंचों का अनिश्चितकालीन अनशन, 315 ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्ति के लिए कोर्ट के आदेश की मांग
Wardha Protest News: वर्धा में न्यायालय के आदेशानुसार 315 पूर्व सरपंचों को प्रशासक नियुक्त करने की मांग को लेकर सरपंच संघ ने जिला परिषद के सामने भीषण गर्मी में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया है।
- Written By: रूपम सिंह
वर्धा सरपंच अनशन शुरू (सोर्स-सोशल मीडिया)
Wardha Sarpanch Association: वर्धा जिले में भिषण तापमान के बीच सरपंच संघ ने न्यायालय के आदेश के पालन की मांग को लेकर जिला परिषद कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया है। यह आंदोलन जिले की 315 ग्राम पंचायतों के पूर्व सरपंचों को प्रशासक नियुक्त करने की मांग को लेकर किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, जनवरी 2024 से दिसंबर 2025 के बीच कार्यकाल समाप्त होने वाली 315 ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने वर्धा जिला सरपंच संघ के माध्यम से मुंबई उच्च न्यायालय के नागपुर खंडपीठ में याचिका दायर की थी।
10 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान न्यायालय ने 20 फरवरी 2026 के परिपत्र को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश राज्य सरकार सहित सभी संबंधित पक्षों को दिए थे। सरपंच संघ ने इस आदेश के पालन हेतु जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को ज्ञापन देकर 315 सरपंचों को तुरंत प्रशासक नियुक्त करने की मांग की थी।
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साथ ही चेतावनी दी गई थी कि यदि आदेश जारी नहीं किया गया तो 24 अप्रैल से अनिश्चितकालीन उपोषण किया जाएगा। बावजूद इसके आदेश जारी नहीं होने पर संघ ने उपोषण का रास्ता अपनाया। जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र राऊत के नेतृत्व में शुरू हुए इस आंदोलन में में बड़ी संख्या में सरपंच और पदाधिकारी शामिल हुए हैं।
आदेश आने तक अनशन जारी रहेगा
संघ का कहना है कि जब तक सभी 315 सरपंचों को प्रशासक नियुक्त करने का आदेश जारी नहीं होता, तब तक उपोषण जारी रहेगा, चाहे तापमान कितना भी अधिक क्यों न हो। उपोषण के पहले दिन शिवसेना (शिंदे गुट) की विधायक मनीषा कायंदे ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेश का
पालन हर हाल में होना चाहिए और इस मुद्दे पर ग्राम विकास मंत्री जयकुमार गोरे से चर्चा करने का आश्वासन दिया।
बताया गया कि 13 अप्रैल को मुंबई में अधिवक्ता कारंजेकर ने ग्राम विकास विभाग और पंचायत राज विभाग के सचिव एकनाथ डवले को न्यायालय के आदेश के पालन के लिए आवेदन सौंपा था। सचिव ने इस संबंध में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को अधिकार दिए जाने की बात कही थी, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
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4 दिन बीतते पर भी कोई आदेश जारी नहीं किया
मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा शासन से मार्गदर्शन मांगे जाने के बावजूद चार दिन बीत जाने पर भी कोई आदेश जारी नहीं होने से सरपंच संघ में नाराजगी है। यही कारण है कि अब उन्होंने अनिश्चितकालीन उपोषण का सहारा लिया है।
इस आंदोलन में संगठन के सचिव संजय दुमणे, राजेश सावरकर, कीर्ती सवाई, सतिश ठाकरे, विनोद वानखेडे, अरुण सायंकार, संतोष सेलुकर सहित सरपंच संगठन के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र राऊत, विलास नवघरे, मुरलीधर चौधरी तथा कई पदाधिकारी और पूर्व सरपंच बड़ी संख्या में शामिल हैं।
