कोका अभयारण्य के बफर क्षेत्र में 5 वर्षीय नर भालू की मौत, वन्यजीव संघर्ष की आशंका
Bear Death in Koka Sanctuary: नागझिरा टाइगर रिजर्व के कोका अभयारण्य में आपसी संघर्ष के दौरान एक 5 वर्षीय नर भालू की मौत हो गई। NTCA गाइडलाइंस के तहत वन विभाग मामले की जांच कर रहा है।
- Written By: केतकी मोडक
मरा भालू (सोर्स - फोटो नवभारत)
Bhandara Wildlife News नवेगांव-नागझिरा टाइगर रिजर्व के नागझिरा खंड के अंतर्गत आने वाले कोका वन्यजीव अभयारण्य के बफर क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। भंडारा तहसील के मंडनगांव क्षेत्र के जंगलों में वन्यजीवों के बीच हुए एक बेहद हिंसक और खूनी संघर्ष में एक ५ वर्षीय नर भालू की दर्दनाक मौत हो गई। वन विभाग की नियमित गश्त टीम को यह भालू तड़पती हुई हालत में मिला था, जिसने देखते ही देखते दम तोड़ दिया। घटनास्थल की भयावहता को देखकर अधिकारी भी हैरान हैं और प्राथमिक तौर पर इसे दो भारी-भरकम वन्यजीवों के बीच वर्चस्व की लड़ाई का नतीजा माना जा रहा है।
गश्त के दौरान सुनाई दी चीखें
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह कोका अभयारण्य के मंडनगांव वन क्षेत्र के गट क्रमांक २०६ के समीप वनरक्षक ए.सी. हटकर और उनके सुरक्षा कर्मी हमेशा की तरह नियमित गश्त पर थे। सुबह करीब ८ बजे अचानक उन्हें जंगल के घने हिस्से से जानवरों के आपस में भयंकर तरीके से लड़ने और चीखने की आवाजें सुनाई दीं।
जब वनकर्मी सतर्कता बरतते हुए आवाज की दिशा में आगे बढ़े, तो नाले के पास का नजारा बेहद डरावना था। वहाँ एक नर भालू गंभीर रूप से लहूलुहान हालत में नाले में गिरा हुआ था और दर्द से तड़प रहा था। वनकर्मियों ने बिना वक्त गंवाए तुरंत वायरलेस पर अपने वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना दी, लेकिन जख्म इतने गहरे थे कि मदद पहुंचने से पहले ही कुछ ही मिनटों में भालू ने दम तोड़ दिया।
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गुप्तांग पर किया गया था जानलेवा वार
घटना की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्र संचालक पियुषा जगताप तथा उपसंचालक प्रितमसिंग कोडापे के मार्गदर्शन में सहायक वनसंरक्षक सुहास कांबले और वनपरिक्षेत्र अधिकारी सुरजकुमार गोखले तुरंत खोजी दस्तों के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने जब घटनास्थल का बारीकी से पंचनामा किया, तो वहां रोंगटे खड़े कर देने वाले साक्ष्य मिले।
मृत भालू के गुप्तांग पर किसी नुकीले दांत या पंजे से बेहद गंभीर चोट पहुंचाई गई थी। पगडंडी पर निरीक्षण के दौरान भालू का अंडकोष शरीर से अलग अवस्था में पड़ा हुआ मिला। आसपास का पूरा इलाका खून से लाल हो चुका था। वहां मौजूद पलाश की झाड़ियों के पत्तों, तनों और जमीन पर संघर्ष के स्पष्ट चिन्ह दिखाई दे रहे थे, जिससे यह साफ होता है कि भालू ने अपनी जान बचाने के लिए सामने वाले शिकारी या प्रतिद्वंद्वी जानवर से काफी देर तक लोहा लिया था।
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NTCA के नियमों के तहत हुआ पोस्टमार्टम
मृत भालू की उम्र लगभग ५ वर्ष आंकी गई है, जो कि भालू प्रजाति के लिए पूरी तरह से वयस्क और सक्रिय उम्र मानी जाती है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के कड़े प्रोटोकॉल के तहत राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के प्रतिनिधि शैलेश राजपूत, मुख्य वन्यजीव रक्षक के प्रतिनिधि पंकज देशमुख, पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. शुभम गुरवे और पशु चिकित्सक मेघराज तुलावी की उच्च स्तरीय टीम की मौजूदगी में शव का परीक्षण किया गया।
वन विभाग ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला पूरी तरह से दो वन्यजीवों के बीच आपसी इलाके या मादा के वर्चस्व की लड़ाई का लग रहा है। हालांकि, मौत के सही कारणों और हमलावर जानवर की पहचान के लिए वन्यजीव विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है और बफर क्षेत्र में ट्रैप कैमरे एक्टिव कर दिए गए हैं।
