वर्धा नगर परिषद चुनाव: टिकट वितरण में आयाराम-गयाराम हावी, सभी दलों में बढ़ी नाराजगी

Wardha Election Ticket Distribution: वर्धा जिले में नगर परिषद चुनाव से पहले टिकट बंटवारे पर सभी दलों में भारी नाराजगी। आयाराम-गयाराम को तरजीह, पुराने कार्यकर्ता किनारे।
Wardha Election Ticket Distribution: वर्धा जिले में नगर परिषद चुनाव से पहले टिकट बंटवारे पर सभी दलों में भारी नाराजगी। आयाराम-गयाराम को तरजीह, पुराने कार्यकर्ता किनारे।
वर्धा न्यूज
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Maharashtra Local Body Polls: वर्धा जिले के 6 नगर परिषद के टिकट बंटवारे में आयाराम-गयाराम को बड़ा महत्व मिला है। सभी दलों ने पार्टी से अनेक वर्ष से जुड़े कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया। टिकट बंटवारे में भाजपा विधायकों अनेक को जोर का झटका दिया है। वहीं कांग्रेस, राकां, शिवसेना ने भी एन समय पर अनेकों की टिकट काटते हुए आयाराम को टिकट दिया है।

परिणामवश सभी दलों में फिलहाल नाराजगी दौर देखने मिल रहा है। जिले के वर्धा, हिंगनघाट, आर्वी, पुलगांव, देवली व सिंदी रेलवे नगर परिषद का चुनाव होने जा रहा है। बीते चुनाव में भाजपा के सभी नप पर नगराध्यक्ष पद पर प्रत्याशी विजयी होने के साथ पूर्ण बहुमत मिला था। इस बार भी पार्टी यही सिलसिला कायम रखना चाहती है। परंतु पार्टी ने इस बार बड़ी सर्जरी की है।

विधानसभा चुनाव में पार्टी विरोध काम करने वाले अथवा निष्क्रिय नगरसेवकों को टिकट काटते हुए नए चेहरों अथवा अन्य पार्टी से आये व्यक्तिों को टिकट दिया है। जिससे भाजपा के कुछ पदाधिकारी व इच्छुकों ने शिवसेना शिंदे, उबाठा, राकां एसीपी, राकां अजीत गुट से संधान साधते हुए टिकट प्राप्त किया है।

वर्धा में प्रस्तापितों को लगा झटका

वर्धा में विद्यमान नगरसेवक प्रदीप ठाकरे, सुमित्रा कोपरे, रंजना पट्टेवार, स्वीकृत नगरसेवक वरूण पाठक समेत अन्य कुछ इच्छुकों की टिकट कांटी है। वहीं कांग्रेस में भी बड़ा झोल हुआ है। कांग्रेस नेता शेखर शेंडे का टिकट वितरण में महत्व न देते हुए पूर्व मंत्री कांबले ने मोर्चा संभाला। राकां एसपी गुट में भी टिकट वितरण को लेकर मतभेद दिखे। शिवसेना ने एक समय पर भाजपा, राकां अजीत गुट से आये हुए कुछ इच्छुकों को प्रत्याशी बनाया। यह सिलसिला अन्य जगह भी कायम रहा है।

आर्वी, हिंगनघाट व सिंदी में टकराव

आर्वी में विधायक दादाराव केचे को विधायक सुमित वानखेड़े ने मात दी। वहीं कांग्रेस में एक गुट को बाजू में रखते हुए सांसद अमर काले ने बड़ा खेला किया। उनके समर्थकों को वहां टिकट दिया गया। कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ने वालों में भी उनके समर्थक है। हिंगनघाट व सिंदी में समीर कुणावार का टिकट वितरण में बोलबाला रहा। यहां भी टिकट नहीं मिलने के कारण सभी पार्टियों में नाराजगी देखने मिली।

देवली में पूर्व सांसद व विधायक में रार

देवली में भाजपा में पूर्व सांसद व विधायक राजेश बकाणे के बीच रार निर्माण हुई। वरिष्ठ स्तर से समझौता होने के बाद दोनों में सहमति बनी। परंतु तडस के कट्टर समर्थक पूर्व नप उपाध्यक्ष नरेंद्र मदनकर ने निर्दलीय के रूप में नामांकन भरकर चुनौती देने का प्रयास किया। कांग्रेस की पूरी बागडोर यहां रणजीत कांबले के हाथ रही।

सभी दलों में नाराजगी का आलम

पुलगांव में भाजपा व कांग्रेस में नाराजगी देखने मिली है। यहां चारुलता टोकस गुट को महत्व नहीं देने के कारण पूर्व नगराध्यक्ष मनीषकुमार साहू के परिवार से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया गया। फिलहाल सभी दलों में नाराजगी का आलम चल रहा है। अनेकों अन्य पार्टी का दामन थामा निर्दलीय के रूप में नामांकन भरने के कारण सभी के लिये बागियों को शांत करने की कवायद होगी। सबसे अधिक नाराजगी भाजपा व कांग्रेस में देखने मिल रही है। यही नाराजगी दोनों प्रमुख दलों के लिए आगे अग्निपरीक्षा हो सकती है।

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