वर्धा न्यूज
Gram Vikas Vibhag Order: महाराष्ट्र राज्य के ग्रामविकास विभाग ने नया आदेश जारी किया है। इसके तहत 28 फरवरी 2026 अथवा उससे पहले कार्यकाल पूर्ण करने वाली तथा प्रशासनिक कारणों से जिन ग्रामपंचायतों में चुनाव नहीं हो सके हैं, वहां प्रशासक नियुक्त किए जाएंगे। जिले में पहले से ही 316 ग्रामपंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और वहां प्रशासक नियुक्त किए जा चुके हैं।
नए आदेश के बाद 28 और ग्रामपंचायतें इसमें शामिल हो गई हैं। फलस्वरूप अब जिले की कुल 344 ग्रामपंचायतों में आगामी चुनाव तक प्रशासक राज रहेगा। वहीं दो नवनिर्मित ग्रामपंचायतों के संबंध में आदेश लंबित बताया गया है।
ज्ञात हो कि न्यायालय में लंबित मामलों तथा अन्य कारणों से स्थानीय स्वराज संस्थाओं के चुनाव स्थगित थे। फिलहाल राज्य में नगर पंचायत, नगर परिषद, महानगरपालिका के साथ-साथ कुछ जिलों में जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव संपन्न हो चुके हैं। हालांकि वर्धा सहित कुछ जिलों में आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक होने के कारण जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव रुके हुए हैं।
यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्र की रीढ़ मानी जाने वाली ग्रामपंचायतों के चुनाव भी अटके हुए हैं। वर्धा जिले में कुल 521 ग्रामपंचायतें हैं। दिसंबर 2025 से पहले कार्यकाल समाप्त करने वाली 316 ग्रामपंचायतों में चुनाव होने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन आरक्षण के मुद्दे और अन्य कारणों से चुनाव स्थगित हो गए। परिणामस्वरूप इन ग्रामपंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति की गई और पिछले कुछ महीनों से प्रशासक ही कार्यभार संभाल रहे हैं।
ग्रामविकास विभाग की सहसचिव वर्षा भरोसे ने 20 फरवरी को आदेश जारी कर 28 फरवरी या उससे पहले कार्यकाल समाप्त करने वाली तथा किसी कारणवश चुनाव न होने वाली ग्रामपंचायतों में प्रशासक नियुक्ति के निर्देश जिला परिषद प्रशासन को दिए हैं। ग्रामपंचायत चुनाव विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले की 28 ग्रामपंचायतें अपना कार्यकाल पूर्ण कर रही हैं, जिन पर भी शीघ्र प्रशासक नियुक्त किए जाएंगे।
वहीं कारंजा-घाडगे तहसील की खैरी पुनर्वास और देवली तहसील की बोरगांव पुनर्वास इन दो नवनिर्मित ग्रामपंचायतों के संबंध में निर्णय लंबित है। इस संदर्भ में वरिष्ठ स्तर पर पत्राचार किया गया है। आदेश प्राप्त होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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जिले में जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव पहले से ही रुके हुए हैं। इसके साथ ही ग्रामपंचायत चुनाव भी स्थगित होने से विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों तथा इच्छुक उम्मीदवारों में निराशा का माहौल है।
वर्तमान में जिले की लगभग 60 प्रतिशत ग्रामपंचायतों में प्रशासक नियुक्त हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी समस्याएं सुनने वाला कोई जनप्रतिनिधि नहीं है। कुछ स्थानों पर मनमाने ढंग से कार्य होने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। कई विकास कार्य लंबित पड़े हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए ग्रामीणों में प्रशासक राज को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है।