National Handloom Day: सेवाग्राम बना आत्मनिर्भरता की मिसाल, कपास से कपड़ा पहल से लाखों का कारोबार
Cotton To Cloth Initiative: सेवाग्राम आश्रम प्रतिष्ठान की ‘कपास से कपड़ा’ पहल के तहत 16 हजार मीटर खादी का उत्पादन हुआ। खादी बिक्री से 48 लाख रुपये का कारोबार और 30 स्थानीय महिलाओं को रोजगार मिला।
- Written By: आंचल लोखंडे
सेवाग्राम खादी- फाइल फोटो (सोर्सः सोशल मीडिया)
Sevagram Khadi Production: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने सेवाग्राम आश्रम से स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी थी, जिसके कारण वर्धा स्वतंत्रता संग्राम का प्रमुख केंद्र बना। गांधीजी के स्वदेशी और स्वावलंबन के विचारों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से गांधी आश्रम प्रतिष्ठान ने वर्ष 2017 से ‘कपास से कपड़ा’ निर्माण अभियान शुरू किया है। गांधी विचारधारा से प्रेरित सेवाग्राम आश्रम प्रतिष्ठान के खादी उत्पादन विभाग ने वर्ष 2024-25 में लगभग 14 हजार मीटर खादी का उत्पादन किया, जिसकी कीमत करीब 42 लाख रुपये रही।
वहीं वर्ष 2025-26 में 16 हजार मीटर खादी का उत्पादन किया गया। खादी की बिक्री से लगभग 48 लाख रुपये का कारोबार होने की जानकारी दी गई। सेवाग्राम आश्रम प्रतिष्ठान सरकार से किसी प्रकार का अनुदान स्वीकार नहीं करता। प्रतिष्ठान के पास लगभग 120 एकड़ कृषि योग्य भूमि है, जिसमें से कुछ हिस्से में कपास की खेती की जाती है। इसी कपास से धागा तैयार कर हाथकरघे पर खादी का कपड़ा बुना जाता है।
‘कपास से कपड़ा’ पहल से 48 लाख का कारोबार
इस कार्य में 30 स्थानीय महिला श्रमिकों को रोजगार मिला है। इन महिलाओं को पहले प्रशिक्षण दिया गया था। प्रतिष्ठान के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य केवल खादी उत्पादन ही नहीं, बल्कि लोगों में स्वदेशी के प्रति अपनापन और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करना भी है। सेवाग्राम आश्रम परिसर स्थित ‘कपास से कपड़ा’ इकाई में कपास से धागा तैयार करने के बाद हाथकरघे पर खादी बुनी जाती है।
सम्बंधित ख़बरें
विक्रोली में तेज संगीत को लेकर पारिवारिक विवाद में चाकूबाजी, पिता और 14 वर्षीय बेटे की मौत; 2 गिरफ्तार
नासिक TCS धर्मांतरण मामला में बड़ी कार्रवाई, आरोपी निदा खान को पनाह देने वाले AIMIM पार्षद मतीन पटेल गिरफ्तार
महाराष्ट्र में ISIS और अल-कायदा से जुड़े 114 कट्टरपंथी प्रकाशनों पर बैन, सरकार का बड़ा एक्शन
HAJ 2027: संभाजीनगर से 1,151 यात्री चयनित, 1,301 वेटिंग लिस्ट में, जानें कबतक होगा डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन…
यहीं खादी के कपड़ों की आकर्षक रंगाई और छपाई भी की जाती है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हैडलुम दिन के मौके पर अपने एक्स अकाउंट पर वीडियो जारी कर भारतीय बुनकरों का हुनर दुनिया तक पहुंचाने की देशवासियों से अपील की है।
Tomorrow, 7th August is National Handloom Day. Let’s make India’s handloom diversity popular. Share your videos with your favourite handloom products, including GRWM videos on social media. Don’t forget to use #NationalHandloomDay. pic.twitter.com/zoFdTXphRL — Narendra Modi (@narendramodi) August 6, 2026
30 स्थानीय महिलाओं को मिला रोजगार
सेवाग्राम आश्रम प्रतिष्ठान की खादी निर्माण इकाई में हाथकरघे पर खादी तैयार करने का कार्य 30 स्थानीय महिलाएं कर रही हैं। सभी महिलाओं को इस कार्य का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे उन्हें स्थायी रोजगार मिलने के साथ-साथ स्वदेशी आंदोलन को भी मजबूती मिल रही है।
ये भी पढे़: वर्धा में इंस्टाग्राम चैट से शुरू हुआ विवाद फिर अपहरण कर किया चाकू से हमला, चलती कार से फेंका, 8 पर FIR
प्राकृतिक रंगों का किया जाता है उपयोग
खादी के कपड़ों को रंगने और आकर्षक डिजाइन देने के लिए पूरी तरह प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है। इन रंगों को तैयार करने में हरड़, बहेड़ा, कत्था, गेंदे का फूल, कलस फूल, धावरी फूल, रतनजोत की छाल, इंडिगो तथा सपन जैसी प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है।
