वर्धा में मानसून कि देरी से बढ़ी किसानों की चिंता, बुआई पर मंडराया संकट
El Nino Impact: देवली में जून का आधा महीना बीत जाने के बाद भी मानसून सक्रिय नहीं होने से किसान बेहद चिंतित हैं। अल-नीनो के साए और बढ़ते लागत खर्च के बीच किसानों पर दुबारा बुआई का संकट मंडरा रहा है।
- Written By: केतकी मोडक
चिंतित किसान प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मिडिया)
Wardha Farmers Monsoon Delay Crisis: आधा जून महीना समाप्त हो गया है। फिर भी मानसून सक्रीय नहीं हुआ। इस बार अल-निनो के खतरे के चलते कम बारिश होगी, ऐसा अनुमान मौसम विभाग द्वारा जताया है। फिर भी सटीक जानकारी देने मौसम विभाग विफल साबित हो रहा है। इस बार खेती में उत्पादन होगा अथवा नहीं, इस बात को लेकर किसानों ने चिंताग्रस्त भावनाएं व्यक्त की है।
चारों ओर संकटों से घिर गए किसान
मुरदगांव अजय ओझा ने कहा है कि “इंधन के रेट बढ़ने के कारण ट्रैक्टर से खेती की मशागत के रेट बढ़ गए है। सरकार की कर्जमाफी योजना से संभ्रम निर्माण हो गया है। 2019 में जीस किसानों की कर्जमाफी हुई थी। जिसका लाभ जिन्हे मिला, उन्हें कर् बैंक से कर्जा नहीं मिल रहा है। मानसून सक्रीय नहीं होने से कुओं का जलस्तर सूख गया। जानवरों को चारा भी नहीं मिल रहा है। किसान विविध संकटों से घिर गए है।”
खराब हो रही मानसिक स्थिति
देवली किसान नितिन देवगीरकर ने कहा है कि “किसानों ने बीज, खाद आदि सभी जरूरी सामग्री खरीदी कर बारिश की प्रतीक्षा में बैठा हुआ है। दौरान किसानों ने अपने पास का संपूर्ण पैसा लगा दिया। पानी नहीं आने के कारण किसानों की मनस्थिति खराब हो रही है। बारिश नहीं आयी तो बुआई कैसे करें, यह प्रश्न उपस्थित हो गया है। जिसमें मौसम विभाग के गलत अंजाद से सभी गुमराह हो रहे है। मौसम विभाग सटीक जानकारी दे।”
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लागत खर्च में हो रही वृद्धि
देवली गांव किसान गजानन महल्ले ने कहा है कि “अबतक मानसून सक्रीय हो जाना चाहिए था। बारिश के अभाव में किसानों की बुआई रुक गई है। परिणामवश इस वर्ष उपज में गिरावट होने वाली है। दुबार बुआई का संकट निर्माण होने से किसानों का लागत खर्च भी नहीं निकलेगा। किसान सभी ओर से संकटों से घिरे हुए है।”
दोबारा बुआई का संकट
देवली किसान प्रवीण तेलरांघे ने कहा है कि “कारण किसानों के उपज में भविष्य में गिरावट होना तय है। जून महीना आधा समाप्त हो गया है। फिर भी तेज धूप गिर रही है। इस परिस्थिति में मजदूरी के रेट में वृद्धि हो गई है कुछ क्षेत्र में बारिश गिरने के बाद किसानों ने बीज बोएं थे। लेकिन तेज धूप के कारण दुबार बुआई का संकट निर्माण हो सकता है।”
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किसानों की आर्थिक स्थिति पर बुरा असर
इसापुर किसान नरेश ढोकणे ने कहा है कि “2 नक्षत्र आकर चले गए फिर भी मानसून सक्रीय नहीं हुआ। कभी इधर तो कभी उधर बारिश गिर रही है। जिससे किसान भ्रम की स्थिति में है। बुआई करे तो कब, ऐसा प्रश्न उनके सामने निर्माण हो गया है। अगर स्थिति ऐसी ही रही तो किसानों को दुबार बुआई करनी पड़ सकती है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ेगा।”
