गड़चिरोली में नशामुक्ति की नई पहल तेज, महुआ फूल से शराब के बजाय लड्डू बनेंगे
Gadchiroli Mahua Phool: गड़चिरोली में 'सर्च' और 'मुक्तिपथ' द्वारा आयोजित महुआ परिषद में डॉ. अभय बंग ने महुआ फूल का उपयोग शराब के बजाय पौषण आहार के रूप में करने पर जोर दिया। महिला समूहों ने लगाए स्टॉल।
- Written By: केतकी मोडक
महुआ फूल परिषद (सोर्स - फोटो नवभारत)
Gadchiroli Mahua Phool Parishad: महुआ फूल से बनने वाले पौष्टिक खाद्य पदार्थों को कुपोषण उन्मूलन कार्यक्रमों में शामिल किया जाना चाहिए। यदि महुआ फूल का उपयोग शराब बनाने के बजाय पौष्टिक आहार तैयार करने में किया जाए, तो शराब की समस्या कम करने, कुपोषण से लड़ने और महिलाओं के लिए रोजगार सृजित करने जैसे तीन महत्वपूर्ण उद्देश्य एक साथ पूरे किए जा सकते हैं। इसके लिए मिशन मोड़ में कार्य करने की आवश्यकता है।
ऐसा कथन ‘सर्च’ संस्था के अध्यक्ष पद्मश्री डा. अभय बंग ने व्यक्त किए। गड़चिरोली कला दालन में 19 जून को आयोजित “महुआ फूल से शराब नहीं, पोषक आहार बनाइए विषयक सार्वजनिक परिषद का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में अध्यक्षीय संबोधन करते हुए वे बोल रहे थे। कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि के रूप में जिलाधिकारी अविशांत पंडा उपस्थित थे।
परिषद का आयोजन मुक्तिपथ, जिला नशामुक्ति संगठन और सर्च संस्था द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था। डा। बंग ने कहा कि गांवों में शराब की लत का सबसे अधिक दुष्प्रभाव महिलाओं और बच्चों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि गड़चिरोली में शराब की समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है, जब महुआ फूल को पौष्टिक खाद्य पदार्थों और मिठाइयों के कच्चे माल के रूप में व्यापक रूप से उपयोग में लाया जाए।
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उन्होंने महुआ फूल को पूर्णतः प्राकृतिक और जैविक उत्पाद बताते हुए इसके व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया। ‘आम्ही आमच्या आरोग्यासाठी’ संस्था के प्रमुख डा. सतीश गोगुलवार ने “महुआ मिशन” शुरू करने की मांग की। पूर्व विधायक हिरामन वरखड़े ने वन उपज के वित्तीय महत्व पर रोशनी डाली। एटापल्ली के आदिवासी लक्ष्मी महिला बचत समूह की अध्यक्ष वंदना गावड़े ने भी अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के लिए विधायक डा. मिलिंद नरोटे तथा विधायक रामदास मसराम ने शुभकामना संदेश भेजे. परिषद में डा. रानी बंग, डा. आनंद बंग, अमृत बंग, राहुल कालभोर, प्रफुल्ल बोपचे, अश्विन घणमारे, रेवती जगधन, विलास निंबोरकर, मनोहर हेपट, डा. सूर्यप्रकाश गभणे तथा हर्षल हरडे सहित अनेक व्यक्ति उपस्थित थे।
महिला बचत समूहों को प्रोत्साहन दिया जाए
परिषद की ओर से राज्य सरकार को एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें मांग की गई कि महुआ फूल से पौष्टिक खाद्य पदार्थ तैयार करने वाले महिला बचता समूहों को विशेष प्रोत्साहन दिया जाए। साथ ही आंगनवाडी, विद्यालय, आश्रमशाला तथा मातृ-स्वास्थ्य कार्यक्रमों में इन उत्पादों का प्राथमिकता से उपयोग किया जाए।
इससे महुआ फूल का उपयोग शराब के बजाय पौष्टिक आहार के रूप में होगा, महिलाओं को रोजगार मिलेगा और कुपोषण में कमी आएगी। परिषद में महुआ फूल से शराब नहीं, लहू बनाइए का संदेश घर-घर पहुंचाने का संकल्प भी लिया गया।
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महुआ फूल उत्पादों की प्रदर्शनी में जमकर बिक्री
परिषद स्थल पर महुआफूल से तैयार विभिन्न पौष्टिक खाद्य उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें 22 महिला बचत समूहों ने भाग लिया, प्रदर्शनी का उद्घाटन डा. रानी बंग ने किया प्रदर्शनी में महुआ फूल के लडू, पेड़ा, चकली, चिवडा, शंकरपाली, केक सहित कई प्रकार के उत्पाद प्रदर्शित किए गए। इन उत्पादों की बड़ी मात्रा में बिक्री हुई और लोगों ने उन्हें उत्साहपूर्वक खरीदा।
