नागपुर में बिजनेस इन्वेस्टमेंट के नाम पर 2.51 करोड़ की धोखाधड़ी; SC के आदेश के बाद पिता-पुत्र पर FIR दर्ज
Nagpur Investment Fraud: नागपुर में एक व्यवसायी को निवेश पर अच्छा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर 2.51 करोड़ रुपये की कथित ठगी की गई। पुलिस ने पिता-पुत्र के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर, निवेश ठगी, व्यवसायी, एमपीआईडी एक्ट,(सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur Financial Scam: नागपुर पिता-पुत्र ने एक व्यवसायी को अपने व्यापार में पैसा निवेश करने की एवज में अच्छा मुनाफा मिलने का झांसा देकर 2.51 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया। बजाजनगर पुलिस ने पिता-पुत्र के खिलाफ एमपीआईडी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच आरंभ की है। उल्लेखनीय है कि पीड़ित व्यक्ति को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद यह एफआईआर की गई।
पुलिस ने कैनल रोड, रामदासपेठ निवासी प्रकाश गोविंदलाल अग्रवाल की शिकायत पर मामला दर्ज किया है। आरोपियों में स्नेहनगर निवासी सत्यजीत सुधाकर वाचासुंदर और ऋषिकेश सत्याजीत वाचासुंदर का समावेश है।
प्रकाश एमआईडीसी में वेदांत पेपर क्राफ्ट प्रा. लि. कंपनी चलाते हैं। वहीं सत्यजीत और ऋषिकेश भी हिंगना एमआईडीसी में व्यवसाय करते हैं। इस वजह से प्रकाश और उनकी पहचान थी। लक्ष्मीनगर के गणेश चैंबर में उनका कार्यालय भी है।
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24 फीसदी ब्याज का लालच देकर 2.51 करोड़ रुपये का निवेश कराया
वर्ष 2015 में पिता-पुत्र उनसे मिलने आए, दोनों ने अपने रॉयल ब्लू रिसॉर्ट कंपनी के बारे में बताया, ताडोबा में 15 एकड़ जमीन पर रिसॉर्ट बनाने का काम शुरू करने की जानकारी दी और आर्थिक सहायता मांगी, आरोपियों ने प्रकाश और उनके बेटे को निवेश की गई स्कम पर प्रति वर्ष 24 प्रतिशत ब्याज देने का आश्वासन दिया।
डील फायदेमंद होने के कारण अग्रवाल परिवार ने निवेश की हामी भर दी। अप्रैल 2015 अप्रैल 2019 तक प्रकाश ने अपने और परिवार के सदस्यों के खातों से वाचासुंदर को 2.51 करोड़ रुपये दिए, ब्याज के तौर पर 1.81 करोड़ रुपये लौटाए गए।
सुप्रीम कोर्ट से राहत के बाद एमपीआईडी एक्ट के तहत मामला दर्ज
दिसंबर 2019 से प्रकाश को रकम मिलना बंद हो गई। बाद में लॉकडाउन लग गया और इसके बाद भी बहानेबाजी चलती रही। आखिर प्रकाश ने उन्हें नोटिस भेजा, तब भी रकम लौटाने का आश्वासन दिया गया लेकिन रकम नहीं मिली, आखिर प्रकाश ने पुलिस से शिकायत की।
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पुलिस ने इसे दीवानी स्वरूप का मामला बताते हुए न्यायालय जाने को कहा, लोअर और हाई कोर्ट में तो प्रकाश को राहत नहीं मिली, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने वित्तीय संस्था मानते हुए एमपीआईडी एक्ट का आवेदन मान्य किया, पुलिस ने सत्यजीत और ऋषिकेश के खिलाफ मामला दर्ज किया।
