‘लाल्या’ रोग से कपास की फसल संकट में, सरकारी उदासीनता से यवतमाल के किसान हताश
Cotton Crop Lalya Disease: आर्वी तहसील में कपास फसलों को ‘लाल्या’ रोग ने गंभीर नुकसान पहुंचाया। सरकारी उदासीनता से किसान हताश, मुआवजा और तत्काल राहत उपायों की मांग तेज हो गई है।
- Written By: आंचल लोखंडे
‘लाल्या’ रोग से कपास की फसल संकट में (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Wardha News: प्राकृतिक आपदाओं से पहले ही परेशान किसानों पर अब ‘लाल्या’ रोग का गंभीर संकट टूट पड़ा है। तहसील के काशिमपुर, सर्कसपुर, निंबोली, टोणा, देऊरवाड़ा सहित कई क्षेत्रों में कपास उत्पादक खेतों में इस रोग का तीव्र प्रकोप दिखाई दे रहा है। कपास की हरी-भरी पत्तियां लाल होकर सूखने लगी हैं, जिससे पौधों की बढ़वार रुक गई है और उत्पादन पर गंभीर असर पड़ा है।
पहले ही सोयाबीन की फसल बर्बाद होने से आर्थिक संकट झेल रहे किसानों ने कपास को अंतिम उम्मीद माना था, लेकिन अब ‘लाल्या’ रोग ने वह उम्मीद भी छीन ली है। इस गंभीर परिस्थिति में सरकारी तंत्र की ढिलाई और उदासीनता किसानों के आक्रोश को और बढ़ा रही है।
किसानों में तीव्र नाराज़गी
कृषि विद्यालयों, महाविद्यालयों और कृषि विज्ञान विशेषज्ञों की ओर से संभावित रोग और उससे बचाव के उपायों की जानकारी समय पर किसानों तक नहीं पहुंचाई गई। कृषि विभाग की इस लापरवाही से किसानों में तीव्र नाराज़गी है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते चेतावनी और रोकथाम के उपाय बताए गए होते, तो वर्तमान स्थिति टाली जा सकती थी।
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भारतीय कपास महामंडल ने ऑनलाइन पंजीयन शुरू
फसल संकट लगातार गहराता जा रहा है, लेकिन सरकार किसानों के मुद्दों पर गंभीर नहीं दिख रही ऐसी प्रतिक्रिया किसान दे रहे हैं। फसल पर संकट के साथ कपास बिक्री का सवाल भी किसानों को परेशान कर रहा है। भारतीय कपास महामंडल ने ऑनलाइन पंजीयन शुरू किया है, लेकिन कई किसानों का प्रमाणीकरण अब तक नहीं हुआ है। जिन किसानों ने पंजीयन किया है, उनके कपास की खरीद में भी जानबूझकर देरी की जा रही है, ऐसा किसानों का आरोप है।
घर में रखा थोड़ा-बहुत कपास भी सरकार खरीद नहीं रही, जिसके चलते किसानों को मजबूरन निजी व्यापारियों को कम दाम पर कपास बेचना पड़ रहा है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार की नीति व्यापारी हितों को साधने के लिए तो नहीं?
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…तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है
ऐसी परिस्थितियों में किसान पूरी तरह हतबल हो चुके हैं और सरकार से तुरंत राहत की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि ‘लाल्या’ रोग से हुए नुकसान का त्वरित पंचनामा कर मुआवजा घोषित किया जाए। सीसीआई पंजीयन और प्रमाणीकरण प्रक्रिया को तेज कर युद्धस्तर पर कपास खरीद शुरू की जाए। कृषि विभाग तत्काल किसानों को ‘लाल्या’ रोग नियंत्रण हेतु प्रभावी दवाइयां और वैज्ञानिक मार्गदर्शन मुफ्त उपलब्ध कराए। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि समय पर सहायता नहीं मिली, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
