अजित के साथ आखिरी बैठक (सौजन्य-नवभारत)
Ajit Pawar Last Meeting: आज की सुबह मेरे लिए बेहद स्तब्ध कर देने वाली रही। सुबह जैसे ही उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के निधन का समाचार मिला, मन पूरी तरह विचलित हो गया। 21 अगस्त 2025 को हिंगनघाट कृषि उपज मंडी में पवार से मेरी अंतिम मुलाकात हुई थी। उस दिन करीब पांच घंटे तक उनका सान्निध्य मिला। उसी मुलाकात में उन्होंने बारामती में कृषि क्षेत्र में आधुनिक एआई तकनीक को लेकर विस्तार से मार्गदर्शन किया था।
उस समय पवार ने मुझसे कहा था, ‘रणजीत, दो दिन के प्रवास पर बारामती आओ, मैं साथ रहूंगा और आधुनिक कृषि तकनीक को नजदीक से समझने में मदद करूंगा।’ आज उनके निधन की खबर के बाद ये शब्द सुबह से मेरे कानों में गूंज रहे हैं। यह भावुक प्रतिक्रिया राज्य के पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस नेता रणजित कांबले ने व्यक्त की।
रणजीत कांबले ने कहा कि उन्होंने अजित पवार के साथ लगभग 25 वर्षों तक विधानसभा में काम किया। अजीत पवार हमेशा उनके लिए मार्गदर्शक रहे। वे ऐसे एकमात्र नेता थे, जिन्हें मैंने स्वयं देखा है कि वे सुबह 7 बजे मंत्रालय में आम नागरिकों से मिलने के लिए उपलब्ध रहते थे। मंत्रालय के कर्मचारियों को भी उन्होंने सुबह जल्दी आने के स्पष्ट निर्देश दिए थे।
जो नेता सुबह 7 बजे से काम में जुट जाता था, उसे आज राज्य ने खो दिया है। पवार के निधन से उन्हें व्यक्तिगत रूप से गहरी क्षति पहुंची है और साथ ही राज्य को भी एक बड़ा नुकसान हुआ है। उनसे उन्होंने प्रशासन चलाने की कला सीखी। जब वे राज्यमंत्री थे, तब अजित पवार उनके विभाग के कैबिनेट मंत्री थे। पार्टी और गुट से ऊपर उठकर केवल विकास के दृष्टिकोण से काम करने वाला ऐसा नेता आज हमारे बीच नहीं रहा। अंत में रणजित कांबले ने कहा, ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें और पवार परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति दे।
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रणजीत कांबले ने कहा कि यदि किसी विधायक को यह सीखना हो कि आदर्श मतदारसंघ कैसा होना चाहिए, तो उसे बारामती को उदाहरण के रूप में देखना चाहिए। पवार ने विकास कार्यों के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में भी कई प्रयोग किए।
अगस्त माह में हिंगनघाट बाजार समिति की अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने बारामती में कृषि के लिए एआई तकनीक पर चर्चा की थी और किसानों को यह तकनीक समझाने के लिए बारामती भेजने के निर्देश दिए थे। उन्होंने किसानों के रहने और भोजन की पूरी व्यवस्था करने का आश्वासन भी दिया था।