अजित पवार, एकनाथ शिंदे, CM फडणवीस (Image- Social Media)
Ajit Pawar News: महाराष्ट्र में बुधवार को एनसीपी नेता और डिप्टी सीएम अजित पवार की विमान हादसे में मौत हो गई। मुंबई से बारामती जा रहा उनका Learjet 45 विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे से उनका पूरा परिवार गहरे शोक में है।
अजित पवार के निधन से महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मच गई है। एक ओर पूरे राज्य में शोक की लहर है, वहीं दूसरी ओर कई राजनीतिक सवाल भी खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अजित पवार के जाने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति पर इसका क्या असर पड़ेगा और सरकार की स्थिरता पर इसका क्या प्रभाव होगा।
यह घटना सिर्फ एक दुखद हादसा नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र की सत्ता-संतुलन की राजनीति को भी झकझोर देने वाली साबित हो रही है। अजित पवार को लंबे समय से विपक्ष और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच संतुलन बनाए रखने वाले एक अहम पावर फैक्टर के रूप में देखा जाता रहा है। ऐसे में उनका अचानक और अप्रत्याशित निधन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, महायुति गठबंधन और एनसीपी के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है।
राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर राजनीतिक समीकरण अब एक अहम मोड़ पर खड़े नजर आ रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अजित पवार के जाने के बाद शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रभाव को संतुलित करना मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के लिए आसान नहीं होगा।
अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति में एक निर्णायक ताकत माने जाते थे। वे न सिर्फ एनसीपी के बड़े नेता थे, बल्कि महायुति सरकार में भी संतुलन बनाए रखने में उनकी अहम भूमिका थी। उनके निधन से कई राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं…
अजित पवार लंबे समय तक महायुति के भीतर भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच संतुलन बनाए रखने वाली कड़ी थे। उनके जाने से भाजपा और शिंदे गुट के रिश्तों पर असर पड़ सकता है। शिंदे गुट का प्रभाव बढ़ने से मुख्यमंत्री फडणवीस के लिए सत्ता संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, खासकर आगामी चुनावों को देखते हुए।
अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी (शरद पवार गुट) और अजित पवार गुट के बीच दूरियां कम होने की संभावना बढ़ सकती है। इससे पार्टी के पुनर्एकीकरण का रास्ता खुल सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। पहले भी स्थानीय निकाय चुनावों में दोनों गुटों के बीच नजदीकियां देखी गई थीं।
आम जनता के लिए यह एक बड़ी व्यक्तिगत और सामाजिक क्षति है, क्योंकि अजित पवार को बारामती और आसपास के इलाकों के विकास से जोड़कर देखा जाता था। वहीं भाजपा के लिए यह झटका इसलिए भी बड़ा है क्योंकि अजित पवार के साथ गठबंधन से उसे बारामती-पुणे क्षेत्र में राजनीतिक मजबूती मिली थी। अब भाजपा को नई रणनीति और नए गठबंधन विकल्पों पर विचार करना होगा।