अजित पवार (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Ajit Pawar Death News: अपनी स्पष्ट बोली के लिए प्रसिद्ध राज्य के उप मुख्यमंत्री अजित पवार की 26 नवंबर को अकोट में नगर पालिका और नगर पंचायत चुनाव प्रचार सभा जिले की अंतिम सभा साबित हुई। इस सभा में उन्होंने किसानों के मुद्दों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा था। ‘किसान ही हमारी जाति है, किसान संकट में आया तो महाराष्ट्र संकट में आएगा। आचार संहिता समाप्त होते ही किसानों की समस्याएं हल करेंगे।’
दुर्भाग्यवश, 28 जनवरी को विमान दुर्घटना में उनका निधन हो गया, जिसके बाद इस सभा की यादें फिर ताजा हो गईं। उल्लेखनीय है कि 16 वर्षों बाद उन्होंने जिले में छह माह के भीतर दो बार दौरा किया था। सभा में उन्होंने कहा था कि कपास खरीद पर लगाई गई सीमाओं की शिकायतें मिली हैं, जिन पर गंभीरता से ध्यान दिया गया है। उन्होंने किसानों को आश्वासन दिया था कि आचार संहिता समाप्त होते ही इस समस्या का समाधान किया जाएगा।
उन्होंने कहा ‘मैं स्वयं किसान हूं और यहां उपस्थित कई लोग भी किसान हैं। किसान ही लाखों लोगों के पालनहार हैं। अतिवृष्टि से किसानों को भारी नुकसान हुआ, जिसके लिए राज्य सरकार ने 44 हजार करोड़ का पैकेज घोषित कर मदद दी है। किसानों की समस्याएं हल करना और ग्रामीण विकास को मजबूती देना ही हमारा ध्येय है।’
अजित पवार ने सभा में कहा था कि शहर में बिजली, पानी, सड़क और मैदान जैसी मूलभूत सुविधाएं अब भी अधूरी हैं। उन्होंने जनता से अपील की कि वे ईमानदार और नए जोश वाले उम्मीदवारों का समर्थन करें, ताकि इन समस्याओं का समाधान हो सके।
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हिवरखेड़ ग्राम पंचायत को नगर परिषद का दर्जा देने पर मुख्यमंत्री-उपमुख्यमंत्री के बीच श्रेयवाद भी चुनावी सभा में सामने आया। इस पर अजित पवार ने कहा था “सच्चाई ऊपर वाले को ही मालूम है।” उन्होंने बताया कि विधायक अमोल मिटकरी ने यह मुद्दा उठाया था और नगर विकास राज्यमंत्री प्राजक्त तनपुरे के साथ उन्होंने भी पूरा सहयोग दिया, जिससे नगर परिषद का दर्जा संभव हुआ।
सभा में उन्होंने कहा था “लोग कहते हैं मैं स्वभाव से कठोर हूं, कुछ कहते हैं मैं काम का आदमी हूं। चैनल वाले क्या दिखाते हैं, इसके लिए हम काम नहीं करते। मेरा काम ही कारण है कि लोग मुझे लाखों मतों से चुनते हैं। मैं आठ बार विधायक चुना गया हूं। यदि मेरे विकास कार्य देखना चाहते हैं तो बारामती आइए।” अकोट की यह सभा और उनके शब्द अब जिले में उनकी अंतिम राजनीतिक याद के रूप में गूंज रहे हैं।