
(प्रतीकात्मक तस्वीर)
Thane News In Hindi: राज्य की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव में सत्तारूढ़ दलों (भाजपा-शिवसेना राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 68 नगरसेवकों के निर्विरोध चुनाव का मामला मुंबई उच्च न्यायालय पहुंच गया है।
इस संदर्भ में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने चुनाव आयोग का भी दरवाजा खटखटाया है। हाईकोर्ट में दावर याचिका में कहा गया है कि चुनाव लोकतंत्र की एक बुनियादी प्रक्रिया है और वोटरों को अपने वोट के अधिकार का इस्तेमाल करने का मौका मिलना चाहिए, लेकिन निर्विरोध चुनावों के जरिए यह अधिकार छीना जा रहा है।
राज्य की महानगर पालिकाओं के चुनावों में बड़ी संख्या में निर्विरोध नगरसेवक चुने गए हैं। इसके खिलाफ महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) नेता अविनाश जाधन ने वरिष्ठ वकील असीम सरोदे के जरिए हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की है। जिसमें निर्विरोध चुने गए नगरसेवकों वाले वाडों में चुनाव प्रक्रिया की पूरी जांच की मांग की गई है।
याचिका में मनसे का आरोप है कि कई जगहों पर उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने के पीछे दबाव, पैसे बांटना और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल है। ठाणे जिले की ठाणे मनपा के अलावा कल्याण-डोंबिवली, भिवंडी, रायगढ़ जिले के पनवेल, पुणे के पिंपरी- चिंचवड़, जलगांव, धुले और छत्रपति संभाजीनगर में राज्य में सत्ताधारी पार्टी के उम्मीदवार बड़ी संख्या में निविरोध चुने गए हैं। ठाणे जिले की तीन महानगरपालिकाओं में 33 नगरसेवक निर्विरोध चुने गए हैं।
मनसे नेता अविनाश जाधव ने सोमवार को पार्टी के नेता संदीप देशपांडे के साथ राज्य चुनाव आयुक्त दिनेश वाघमारे से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा, जाधव ने निर्विरोध चुनाव प्रक्रिया के खिलाफ मुद्दा उठाते हुये ठाणे में हुये निर्विरोध चुनाव की सभी घटनाओं का ब्यौरा दिया।
उन्होंने यह भी मांग की कि रिटायर्ड जज और बड़े पुलिस अधिकारी की एक जॉइंट कमेटी बनाकर पूरी जांच की जाये और जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती है तब तक निर्विरोध चुने गए नगरसेवकों के फैसले को रोक कर रखा जाये।
जाधव के मुताबिक चुनाव आयुक्त ने भी पॉजिटिव रुख दिखाते हुये मनसे को कार्रवाई का भरोसा दिया है। मनसे नेता अविनाश जाधव ने बताया कि ठाणे मनपा चुनाव में, मनसे समेत चुनाव लड़ने वाले कई उम्मीदवारों को पैसे का लालच दिया गया और सरकारी मशीनरी का गलत इस्तेमाल करके कई उम्मीदवारों के नामांकन पत्र को गलत तरीके से रिजेक्ट कर दिए गए, जिसके कारण उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के 6 उम्मीदवार बिना विरोध के चुन लिए गए।
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इस प्रक्रिया में चुनाव निर्णय अधिकारी की तरफदारी वाली भूमिका, नेताओं का दखल, पैसे का लालच और पुलिस सिस्टम के गलत इस्तेमाल की वजह से उम्मीदवारों को अपने नामांकन पत्र वापस लेने पड़े।






