Narendra Mehta MMRDA Corruption (फोटो क्रेडिट-X)
MMRDA Corruption: महाराष्ट्र विधानसभा के बजट सत्र में आज उस समय गरमागरम बहस छिड़ गई, जब मिरा-भायंदर के विधायक नरेंद्र लालचंद मेहता ने मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार को लेकर सीधे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर सवालों की बौछार कर दी। मेहता ने मिरा-भायंदर और मुंबई के विभिन्न प्रोजेक्ट्स में हो रही धांधली के सबूत पेश करते हुए सरकार को जमकर लताड़ लगाई। उन्होंने आरोप लगाया कि एमएमआरडीए के प्रोजेक्ट्स की लागत रहस्यमयी तरीके से दोगुनी-तिगुनी बढ़ाई जा रही है, जो जनता के पैसे की खुली लूट है।
विधायक मेहता ने विशेष रूप से ठेकेदार जे कुमार और एमएमआरडीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं। उन्होंने सदन में चार महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा और पूछा कि अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा घोटाला कैसे संभव है? मेहता के इन आरोपों के बाद सदन में काफी हंगामा हुआ और विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर जांच की मांग तेज कर दी है।
नरेंद्र मेहता ने भ्रष्टाचार का एक अनोखा उदाहरण पेश करते हुए बताया कि ठेकेदार जे कुमार को एक प्रोजेक्ट के लिए जगह दी गई थी, जिसकी कुल कीमत महज 20 करोड़ रुपये थी। लेकिन पिछले 5 वर्षों के दस्तावेजों में यह दिखाया गया है कि एमएमआरडीए ने उस जगह के लिए 120 करोड़ रुपये का किराया चुकाया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वह जमीन खुद एमएमआरडीए के ही अधीन थी। मेहता ने सवाल किया, “यह किस तरह का भ्रष्टाचार है कि एमएमआरडीए अपनी ही जमीन के इस्तेमाल के लिए अपने ही प्रोजेक्ट के ठेकेदार को करोड़ों का किराया दे रहा है?”
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मेहता ने दहिसर और गायमुख प्रोजेक्ट्स का जिक्र करते हुए एमएमआरडीए की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि दहिसर में जिस प्रोजेक्ट की मूल लागत 43 करोड़ रुपये तय की गई थी, उसके लिए एमएमआरडीए ने 73 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। वहीं, गायमुख प्रोजेक्ट को लेकर उन्होंने आरोप लगाया कि इतनी जल्दबाजी दिखाई गई कि बिना ‘रेट’ निकाले ही टेंडर पास कर दिया गया। उन्होंने पूछा कि आखिर बिना वित्तीय आकलन के टेंडर प्रक्रिया को इतनी तेजी से क्यों निपटाया गया?
सबसे गंभीर आरोप मिरा-भायंदर में बन रहे चार विवादास्पद फ्लाईओवर्स को लेकर लगाया गया। विधायक मेहता ने बताया कि इन फ्लाईओवर्स की टेंडर कॉस्ट 217 करोड़ रुपये थी, लेकिन ठेकेदार कंपनी ने अब 620 करोड़ रुपये का संशोधित बिल पेश किया है। लागत में 400 करोड़ रुपये से अधिक की इस अचानक वृद्धि ने भ्रष्टाचार के बड़े सिंडिकेट की ओर इशारा किया है। मेहता ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मांग की है कि इन प्रोजेक्ट्स का ऑडिट कराया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।