Thane: एमएमआर में महिलाओं और बुजुर्गों के लिए नई परियोजना, जनवरी में शिलान्यास

MHADA कोंकण बोर्ड ठाणे के माजीवाड़ा में कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल और महिला वृद्धाश्रम बनाएगा। तकनीकी अड़चनें दूर होने के बाद परियोजना को जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
Womens Hostel
महिला हॉस्टल (सौ. सोशल मीडिया )
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Hostels In Thane: मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल एवं महिला वृद्धाश्रम के निर्माण का रास्ता लगभग साफ हो गया है। म्हाडा कोंकण बोर्ड ने ठाणे के माजीवाड़ा के विवेकानंद नगर में जगह निश्चित की है जहां पर 7 मंजिला इमारत का निर्माण कर अगल-बगल में महिला वृद्धाश्रम और हॉस्टल बनाया जाएगा।

यह निर्माण कार्य एमएमआर ग्रोथ हब के तहत किया जाना है। ठाणे मनपा ने तकनीकी वजहों से इन दोनों इमारतों के निर्माण को मंजूरी नहीं दी थी। जिससे इस परियोजना को लेकर असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गयी थी। लेकिन अब, कोंकण बोर्ड इस विवाद को सुलझाने और तकनीकी दिक्कतों को दूर करने में कामयाब हो गया है।

जल्द ही, मनपा के निर्देशों के मुताबिक, कोंकण बोर्ड प्रोजेक्ट के लिए नया प्रपोजल भेजकर उसे मंजूरी दिलाएगा। सब कुछ ठीक रहा तो इन दोनों इमारतों का शिलान्यास नए साल के जनवरी महीने में किया जाएगा। म्हाडा ने 'एमएमआर ग्रोथ हब' में आठ लाख घर बनाने की विस्तृत योजना तैयार की है।

इस योजना के अनुसार, म्हाडा ने आम लोगों के लिए किफायती घरों का निर्माण करते हुए समाज के अन्य वर्गों को आश्रय प्रदान करने की एक अलग संकल्पना को अमली जामा पहनाने के कार्य में जुटा है।

इसके तहत निराश्रित बुजुर्गों के लिए वृद्धाश्रम का निर्माण किया जाएगा और कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित आश्रय प्रदान करने के लिए हॉस्टल का निर्माण किया जाएगा। इस योजना के तहत म्हाडा मुंबई बोर्ड कामकाजी महिलाओं के लिए तीन वृद्धाश्रम और सात हॉस्टल का निर्माण करेगा।

38 करोड़ का खर्च

म्हाडा के कोकण बोर्ड ने माजीवाडा के विवेकानंद नगर में लगभग 1300 वर्ग मीटर एरिया में एक वृद्धाश्रम और 1500 वर्ग मीटर एरिया में एक महिला हॉस्टल बनाने का फैसला किया है। ये दोनों बिल्डिंग सात-मंजिला हैं और सभी जरूरी सुविधाओं से लैस होंगी।

वृद्धाश्रम और महिला हॉस्टल की लागत 19-19 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। इन दोनों परियोजनाओं के लिए टेंडर प्रोसेस भी किया गया था। लेकिन, ठाणे मनपा से ओल्ड वृद्धाश्रम और हॉस्टल को मंजूरी न मिलने के कारण प्रोजेक्ट्स मुश्किल में पड़ गए थे। जिस जमीन पर ये दोनों बिल्डिंग्स बनानी है, वह ग्रुप रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट में शामिल है। इसलिए इन प्रोजेक्ट्स के लिए यह जमीन उपलब्ध न होने के कारण मनपा से परमिशन नहीं मिल पा रही थी।

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