
मीरा-भाईंदर मनपा (सोर्स: सोशल मीडिया)
Mira Bhayandar News In Hindi: मीरा भाईंदर महानगरपालिका की सत्ता पर भले ही भाजपा का दबदबा कायम हो, लेकिन विपक्ष ने सियासी बिसात पर ऐसी चाल चली है जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
कांग्रेस और शिवसेना (शिंदे) ने अप्रत्याशित रूप से एकजुट होते हुए एक ही समूह नेता का पंजीकरण करा दिया है, जिससे भाजपा की रणनीति को आंशिक झटका लगने की अटकलें तेज हो गई हैं। हाल ही में संपन्न हुए मनपा चुनाव में भाजपा ने 95 में से 78 सीटें जीतकर बहुमत के 48 सीटों के मैजिक फिगर को पार कर लिया है।
कांग्रेस को 13, शिवसेना (शिंदे) को 3 और 01 निर्दलीय पार्षद चुना गया है। बहुमत के दम पर भाजपा मनपा में सरकार बनाने की ओर बढ़ रही है और महापौर पद के आरक्षण के बाद तैयारियां भी अंतिम चरण में हैं।
इसी बीच गुरुवार को कांग्रेस और शिवसेना (शिंदे) ने कोंकण संभागीय आयुक्त के समक्ष कांग्रेस के नवनिर्वाचित पार्षद जय ठाकुर को संयुक्त रूप से समूह नेता के रूप में पंजीकृत कराया गया है।
यहा मनपा में कांग्रेस और शिवसेना के बीच कोई राजनीतिक गठबंधन नहीं है दोनों दलों के पार्षद केवल एक साझा व्यवस्था के तहत साथ आए हैं, ताकि सभी समितियों में विपक्ष का उचित और सक्षम प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके और मनपा में भाजपा की संख्या का गलत उपयोग रोका जा सके
– मुजफ्फर हुसैन, वरिष्ठ कांग्रेस नेता
जब जनता ने इन्हें पूरी तरह नकार दिया, तो अब अपना वजूद बचाने के लिए ये दोनों दल’ विकास के नाम पर ढोंग कर रहे है। यह’ विकास आघाड़ी’ नहीं, बल्कि’ विश्वासघात’ की आघाड़ी है।
– नरेंद्र मेहता, विधायक, भाजपा
95 सीटों वाली मीरा भाईंदर मनपा में 9.5 के अनुसार कुल 9 स्वीकृत पार्षद होंगे, राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यदि विपक्ष अलग-अलग रहता तो भाजपा 8 स्वीकृत पार्षद हासिल कर लेती और कांग्रेस को केवल 1 सीट मिलती, जबकि शिवसेना (शिंदे) के हिस्से में कोई सीट नहीं आती। लेकिन कांग्रेस-शिवसेना के संयुक्त समूह बनने से समीकरण बदल गया है। अब भाजपा को 7, जबकि विपक्षी गठबंधन को 2 स्वीकृत पार्षद मिलने की संभावना बन गई है। इस पूरे घटनाक्रम पर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही है, हालांकि शिवसेना मंत्री प्रताप सरनाईक ने राजनीतिक गठबंधन से इनकार करते हुए कहा कि यह कदम मीरा-भाईंदर नगर विकास गठबंधन के तहत शहर के विकास को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
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चुनाव के दौरान भी भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने शिवसेना (शिंदे) और कांग्रेस के बीच गुप्त गठबंधन के आरोप लगाए थे, हालांकि तब परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुजफ्फर हुसैन ने इसे सिरे से नकार दिया था। फिलहाल संख्याबल के लिहाज से मनपा की सत्ता भाजपा के हाथ में ही रहेगी, लेकिन विपक्ष की इस रणनीतिक एकजुटता ने यह साफ कर दिया है कि मीरा-भाईंदर की राजनीति में अब सिर्फ बहुमत नहीं, बल्कि रणनीतिक दांव-पेंच का खेल भी जारी है।






