Mumbai Mayor: महाराष्ट्र की राजनीति में महानगर पालिका चुनावों के नतीजों के बाद अब असली सियासी जंग महापौर पद को लेकर शुरू हो गई है। इस संघर्ष का केंद्र बना है मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR), जिसे देश का सबसे बड़ा आर्थिक ग्रोथ इंजन माना जाता है। मुंबई, ठाणे, कल्याण-डोंबिवली, मीरा-भायंदर, नई मुंबई और पनवेल जैसी नगरपालिकाओं पर नियंत्रण को लेकर सभी प्रमुख दलों के बीच कड़ा मुकाबला चल रहा है। वरिष्ठ पत्रकार संजय मलमे के अनुसार, एमएमआर क्षेत्र में हर पार्टी “राजनीतिक सरदार” बनने की होड़ में है। जहां कभी शिवसेना का दबदबा माना जाता था, वहीं अब बीजेपी ने इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना (शिंदे गुट) बीजेपी की रणनीति के कारण दबाव में नजर आ रही है।
Mumbai Mayor: महाराष्ट्र की राजनीति में महानगर पालिका चुनावों के नतीजों के बाद अब असली सियासी जंग महापौर पद को लेकर शुरू हो गई है। इस संघर्ष का केंद्र बना है मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR), जिसे देश का सबसे बड़ा आर्थिक ग्रोथ इंजन माना जाता है। मुंबई, ठाणे, कल्याण-डोंबिवली, मीरा-भायंदर, नई मुंबई और पनवेल जैसी नगरपालिकाओं पर नियंत्रण को लेकर सभी प्रमुख दलों के बीच कड़ा मुकाबला चल रहा है। वरिष्ठ पत्रकार संजय मलमे के अनुसार, एमएमआर क्षेत्र में हर पार्टी “राजनीतिक सरदार” बनने की होड़ में है। जहां कभी शिवसेना का दबदबा माना जाता था, वहीं अब बीजेपी ने इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना (शिंदे गुट) बीजेपी की रणनीति के कारण दबाव में नजर आ रही है।






