नासिक में घोड़ों पर अमानवीय अत्याचार, कील ठोंककर ‘चमत्कारी’ नाल बेची; एनिमल वेल्फेयर की कार्रवाई

Horse Cruelty: नासिक के सिडको में घोड़ों के पैरों में कील ठोंककर ‘चमत्कारी’ नाल बेचने का अमानवीय धंधा सामने आया है। अंबड पुलिस ने घोड़ा मालिकों पर केस दर्ज किया है।
In Nashik, horses subjected to inhumane cruelty; nails hammered into their hooves to sell 'miraculous' horseshoes; animal welfare organization takes action.
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स : सोशल मीडिया )
Published on
Updated on

Animal Welfare Hindi News: सिडको घोड़ों के पालन-पोषण का दिखावा कर उनके साथ रूह कंपा देने वाली क्रूरता का मामला नासिक में सामने आया है। तथाकथित 'किस्मत बदलने वाली' नाल बेचने के लिए घोड़ों के पैरों में बार-बार कीलें ठोंकी जा रही हैं। अंधविश्वास की आड़ में मूक प्राणियों पर हो रहे इस अमानवीय अत्याचार ने मानवता को शर्मसार कर दिया है।

एनिमल वेल्फेयर कार्यकर्ता पुरुषोत्तम आव्हाड को इस गौरखधंधे की जानकारी मिली थी, जिसके बाद उन्होंने योजनाबद्ध तरीके से जाल

बिछाकर संबंधित लोगों को रंगेहाथ धर दबोचा, घोड़ों के पैरों में बार-बार कील ठोककर नाल निकाली जाती है।

इन नालों को रचमत्कारी और सौभाग्य लाने वालीर बताकर भोले-भाले नागरिकों को बेचा जा रहा है। एक नाल की कीमत 700 से 800 रुपये तक वसूली जा रही है। नागरिकों की अज्ञानता और भावनाओं का फायदा उठाकर यह सिंडिकेट सक्रिय है।

घोड़ों पर हो रहे इस क्रूर अत्याचार को गंभीरता से लेते हुए अंबड पुलिस थाने में संबंधित घोड़ा मालिकों और चालकों के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई गई है।

असहनीय पीड़ा में मूक प्राणी

पुरुषोत्तम आव्हाड के अनुसार, वर्तमान में नासिक शहर में 8 से 10 घोड़ों का इस्तेमाल इस घिनौने काम के लिए किया जा रहा है। बार-बार कील ठोंकने और जबरन नाल निकालने की प्रक्रिया के कारण घोड़ों के पैरों में गहरे और गंभीर जख्म हो गए हैं। मूक प्राणी इस असहनीय दर्द को सहने के लिए मजबूर हैं, ताकि कुछ लोग अपनी जेवें भर सकें।

अंधविश्वास को मिल रहा बढ़ावा

यह मामला न केवल पशु क्रूरता का है, बल्कि समाज में फैल रही दकियानूसी सोच का भी परिचायक है। आव्हाड ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मूक प्राणियों के खून-पसीने से पैसा कमाना इंसानियत पर हमला है।

जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि ऐसे गिरोहों के खिलाफ केवल जुर्माना नहीं, बल्कि जेल जैसी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि समाज में सख्त संदेश जाए। प्रशासन से अपील की गई है कि वे नागरिकों को जागरूक करें कि लोहे की किसी नाल से किस्मत नहीं बदलती, बल्कि ऐसी खरीद से वे पशु कुरता के अपराधी बन रहे है।

अंबठ पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। वहत के दोषियों पर पशु क्रूरता निवारण अधिनियम सख्त धाचएं लगाई जा सकती है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि इस नेटवर्क के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल है और ये घोड़े कहां से लाए गए है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com