MBMC Election:मीरा-भाईंदर महानगरपालिका चुनाव (सोर्सः सोशल मीडिया)
MBMC Election: मीरा-भाईंदर महानगरपालिका (MBMC) चुनाव की तारीख नजदीक आते ही शहर की राजनीति गरमा गई है। आरोप–प्रत्यारोप और रणनीतिक चालों के बीच शनिवार को भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने कांग्रेस और शिवसेना के बीच गुप्त गठबंधन (छुपी युति) होने का गंभीर आरोप लगाया है।
भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने पत्रकार परिषद में कहा कि केंद्र और राज्य में एनडीए की सरकार होने के बावजूद महानगरपालिका चुनावों में अलग–अलग स्थानों पर अलग रणनीति अपनाई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मीरा-भाईंदर में शिवसेना भाजपा से मुकाबले में घबराई हुई है और इसी कारण उसने कांग्रेस के साथ छुपी युति कर ली है।
मेहता ने दावा किया कि परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुजफ्फर हुसैन के बीच अंदरखाने समझौता हुआ है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “हिंदुत्व की बात करने वाले नेता मुस्लिम वोटों की मजबूरी में अपनी विचारधारा छोड़ चुके हैं।” हालांकि मंत्री प्रताप सरनाईक ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि कांग्रेस और शिवसेना की विचारधाराएं अलग हैं, ऐसे में युति का सवाल ही नहीं उठता।
नरेंद्र मेहता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस-प्रभावित सीटों पर शिवसेना ने अपने उम्मीदवार नहीं उतारे, जबकि शिवसेना के प्रभाव वाले क्षेत्रों में कांग्रेस ने उम्मीदवार खड़े नहीं किए। कई प्रभागों में कांग्रेस द्वारा नामांकन दाखिल करने के बाद दबाव में पर्चे वापस लेने का भी आरोप लगाया गया।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि भाईंदर पश्चिम के प्रभाग क्रमांक 8 में कुल चार सीटों में से एक सीट पर बहुजन विकास आघाड़ी, एक पर कांग्रेस और दो पर शिवसेना के उम्मीदवार हैं। जिस सीट पर कांग्रेस का उम्मीदवार है, वहां शिवसेना ने प्रत्याशी नहीं उतारा, जबकि शिवसेना की सीट पर कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार वापस ले लिया। इसी तरह प्रभाग क्रमांक 9, 10, 13, 21 और 22 सहित कई अन्य प्रभागों में भी कांग्रेस-शिवसेना के बीच कथित गुप्त तालमेल होने का आरोप लगाया गया। मेहता ने कहा कि शिवसेना ने पहले भी भाजपा के साथ विश्वासघात किया है, इसी कारण इस बार मनपा चुनाव में युति नहीं की गई।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुजफ्फर हुसैन ने भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि मीरा–भाईंदर में कांग्रेस का जनाधार इतना मजबूत है कि कांग्रेस के खिलाफ भाजपा, शिवसेना, शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (अजित पवार), एनसीपी (शरद पवार), एमआईएम और वंचित बहुजन आघाड़ी जैसी कई पार्टियां मैदान में हैं।
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हुसैन ने आरोप लगाया कि इनमें से कई दलों को भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता की ओर से फंडिंग की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सेक्युलर वोटों के बंटवारे को रोकने के लिए कांग्रेस ने महाविकास आघाड़ी के सभी घटक दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन लगभग एक महीने चली बैठकों के बावजूद सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बन सकी।
उन्होंने कहा कि महाविकास आघाड़ी का टूटना कांग्रेस की वजह से नहीं, बल्कि शिवसेना (यूबीटी) के रुख के कारण हुआ। कांग्रेस ने जितनी सीटों की मांग की थी, उतनी ही सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। कांग्रेस कुल 32 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जिसमें से प्रभाग क्रमांक 8 की एक सीट बहुजन विकास आघाड़ी को दी गई है।
MBMC चुनाव में कांग्रेस-शिवसेना के कथित गुप्त गठबंधन और उसके खंडन के बीच मीरा-भाईंदर की राजनीति पूरी तरह गर्म हो चुकी है। अब यह देखना अहम होगा कि इन आरोप-प्रत्यारोप का असर मतदाताओं पर कितना पड़ता है।