Ulhasnagar Municipal Corporation (सोर्सः सोशल मीडिया)
Ulhasnagar Municipal Corporation: तेरह वर्ष पहले महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की सभी मनपा के शिक्षा बोर्डों को भंग कर उनमें कार्यरत अधिकारियों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को संबंधित मनपा में ही समायोजित करने के आदेश जारी किए थे। लेकिन उल्हासनगर मनपा प्रशासन द्वारा सरकार के दिशा-निर्देशों का अब तक पालन नहीं किया गया है।
प्रशासन की इस उदासीनता को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को मनपा में तत्काल समायोजित करने के मुद्दे को लेकर मनपा के वरिष्ठ नगरसेवक तथा शिवसेना के शहर प्रमुख राजेंद्र सिंह भुल्लर उर्फ महाराज ने मनपा आयुक्त मनीषा अव्हाले को विधिवत लिखित निवेदन पत्र दिया है।
मनपा के स्कूलों से जुड़े सैकड़ों कर्मचारियों की उचित मांग के मुद्दे पर शिवसेना के शहर प्रमुख राजेंद्र सिंह भुल्लर ने ‘नवभारत’ को बताया कि राज्य सरकार के आदेश का पालन करते हुए राज्य की अन्य सभी नगर परिषदों और मनपाओं में शिक्षा बोर्ड के कर्मचारियों के समायोजन की प्रक्रिया वर्ष 2014 में पूरी हो चुकी है।
लेकिन उल्हासनगर मनपा प्रशासन जानबूझकर इसकी अनदेखी कर रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में तत्कालीन मनपा आयुक्त अजीज शेख ने इन कर्मचारियों के समायोजन के संबंध में एक स्पष्ट कार्यालय आदेश जारी किया था। भुल्लर ने कहा कि सरकार के निर्णय और आयुक्त के आदेश के बावजूद सामान्य प्रशासन विभाग ने इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है, जो प्रशासनिक लापरवाही का चरम उदाहरण है।
सीनियर मनपा सदस्य राजेंद्र सिंह भुल्लर के मुताबिक, समायोजन में देरी के कारण इन कर्मचारियों की सेवा पुस्तिकाओं में वर्ष 2013 से आवश्यक प्रविष्टियां नहीं की गई हैं। परिणामस्वरूप कर्मचारी सरकार द्वारा अनुमोदित वेतनमान, पदोन्नति, पेंशन और अन्य सहायक सरकारी लाभों से वंचित हो रहे हैं। कई कर्मचारियों को लगता है कि उनके साथ अन्याय हो रहा है, क्योंकि सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्हें उनके उचित लाभ नहीं मिल रहे हैं। यह मामला कर्मचारियों के सेवा अधिकारों से संबंधित है और प्रशासन की दृष्टि से अत्यंत गंभीर है।
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इस पृष्ठभूमि में राजेंद्र सिंह भुल्लर ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि शिक्षा बोर्ड के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को तुरंत मनपा विभाग में समायोजित किया जाए और वर्ष 2013 से उनकी सेवा पुस्तिकाओं में सभी प्रविष्टियां पूरी की जाएं। उन्होंने उन दोषी अधिकारियों के खिलाफ तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई की भी मांग की है, जिन्होंने इस प्रक्रिया में इतने वर्षों तक देरी की है और सरकारी आदेश का उल्लंघन किया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस पत्र पर क्या रुख अपनाता है और कर्मचारियों को न्याय कब मिलेगा।