शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (डिजाइन फोटो)
Shankaracharya Avimukteshwaranand: मध्य प्रदेश की राजनीति में एक मुस्लिम विधायक ने कुछ कहा कि ज्योतिर्मठ पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बेहद गदगद हैं। भोपाल उत्तर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने विधानसभा में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठाई है। इस पहल पर शंकराचार्य ने न केवल उनकी जमकर तारीफ की है, बल्कि हिंदू विधायकों को उनसे सीख लेने की नसीहत भी दे डाली है।
विधायक आतिफ अकील ने हाल ही में विधानसभा में एक अशासकीय संकल्प पेश किया था। इसमें उन्होंने न केवल गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की, बल्कि गाय की मृत्यु पर उसके सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार और उसके मांस व चमड़े के व्यापार पर पूर्ण रूप से रोक लगाने की बात भी उठाई। यह कदम राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने एक वीडियो जारी कर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अक्सर हमें जिससे उम्मीद होती है, वह उसे पूरा नहीं करता, लेकिन जिससे कोई आशा न हो, वह आगे बढ़कर हमारे हृदय के करीब खड़ा हो जाता है। उन्होंने अकील की इस मांग की सराहना करते हुए कहा कि गौमाता का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार होना चाहिए।
शंकराचार्य ने हिंदू विधायकों पर निशाना साधते हुए कहा कि यह मांग तो उन विधायकों की तरफ से आनी चाहिए थी जो खुद को हिंदू कहते हैं। हिंदू न केवल अपने धर्म का पालन करने में चूक रहे हैं, बल्कि खुद को हिंदू कहलवाने में भी पीछे रह गए हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर अकील का यह प्रस्ताव विधानसभा में असफल रहता है, तो यह हिंदू विधायकों के माथे पर बहुत बड़ा कलंक होगा।
शंकराचार्य ने साफ तौर पर कहा कि आज मध्य प्रदेश विधानसभा के जितने भी हिंदू विधायक हैं, आतिफ अकील उनसे बढ़त ले चुके हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अभी भी मौका है, अगर सभी विधायक इस संकल्प को पारित कर दें, तो वे इस अच्छे कार्य में सहभागी बनकर अभिनंदनीय हो सकते हैं।
उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की राजनीति का भी जिक्र किया और कहा कि संसद में भी मुस्लिम सांसद गौमाता को ‘राष्ट्रमाता’ घोषित करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन जो पार्टियां या सांसद खुद को हिंदू कहते हैं, वे कहीं न कहीं इस मामले में चूक रहे हैं।
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अंत में उन्होंने हर हिंदू से अपील की कि वे गौमाता के पक्ष में खड़े होकर खुद को ‘असली हिंदू’ साबित करें, वरना जनता की नजर में उनका हिंदू होना केवल एक दिखावा ही माना जाएगा। ज्ञात हो कि 17 फरवरी को आतिफ अकील ने यह अशासकीय संकल्प विधानसभा में प्रस्तुत किया था।