Thane Woman Egg Selling Racket प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स AI)
Ulhasnagar Illegal Human Egg Selling: मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) के उल्हासनगर-ठाणे क्षेत्र में महिलाओं के अंडाणु (Eggs) अवैध रूप से बेचने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई में इस सनसनीखेज गोरखधंधे का भंडाफोड़ हुआ, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं की मजबूरी का फायदा उठाकर उनके शरीर का सौदा किया जा रहा था। इस मामले में पुलिस ने तीन महिला दलालों को गिरफ्तार किया है, जिन्हें कोर्ट ने 25 फरवरी 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। जांच में सामने आया है कि यह रैकेट अब तक लगभग 40 महिलाओं को अपना शिकार बना चुका है।
महिलाओं के अंडाणु (Eggs) अवैध रूप से बेचने वाले गिरोह मुख्य रूप से उन महिलाओं को निशाना बनाता था जो गंभीर आर्थिक तंगी से जूझ रही थीं। उन्हें पैसों का लालच देकर उनके अंडाणु निकलवाए जाते थे और फिर उन्हें ऊंचे दामों पर आईवीएफ (IVF) क्लीनिकों या जरूरतमंदों को बेचा जाता था। पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि इस काले कारोबार में कौन-कौन से बड़े मेडिकल प्रोफेशनल्स और अस्पताल शामिल हैं, क्योंकि बिना चिकित्सकीय मिलीभगत के अंडाणु निकालने जैसी जटिल प्रक्रिया संभव नहीं है।
इस पूरे रैकेट का खुलासा तब हुआ जब एक पीड़ित महिला को वादे के मुताबिक पैसे नहीं मिले। ठगी का शिकार हुई महिला ने बदलापुर सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. ज्योत्सना सावंत से संपर्क किया और पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी। यह सुनकर डॉक्टर दंग रह गईं और उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचित किया। बुधवार को बदलापुर पुलिस और मेडिकल टीम ने जोवेली इलाके की ‘नैनो सिटी’ बिल्डिंग में छापेमारी की, जहाँ मुख्य आरोपी सुलक्षणा गाडेकर के घर से यह अवैध धंधा संचालित किया जा रहा था।
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ठाणे पुलिस ने इस मामले में सुलक्षणा गाडेकर (44), अश्विनी चाबुकस्वार (29) और मंजूषा वारिखेड़े (46) को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच करने पर पुलिस को हार्मोनल इंजेक्शनों की तस्वीरें, सोनोग्राफी रिपोर्ट, नकली नामों से तैयार हलफनामे (Affidavits) और वित्तीय लेनदेन के पुख्ता सबूत मिले हैं। जांच में पता चला है कि गिरोह हर प्रक्रिया के लिए महिलाओं को 25,000 से 30,000 रुपये का भुगतान करता था, जबकि खुद मोटी दलाली वसूलता था। फर्जी दस्तावेजों के जरिए महिलाओं की पहचान छिपाई जाती थी ताकि कानून की नजरों से बचा जा सके।
भारत में अंडाणु या शुक्राणु (Sperm) बेचना पूरी तरह गैरकानूनी और दंडनीय अपराध है। सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 (ART Act) के तहत केवल ‘परोपकारी दान’ (Altruistic Donation) की अनुमति है, वह भी केवल पंजीकृत एआरटी बैंकों के माध्यम से।
सजा का प्रावधान: नियमों के उल्लंघन पर 5 से 10 लाख रुपये का जुर्माना और बार-बार अपराध करने पर 8 से 12 साल तक की जेल हो सकती है।
उम्र सीमा: अंडाणु दान करने के लिए महिला की उम्र 23 से 35 वर्ष और शुक्राणु दान के लिए पुरुष की उम्र 21 से 55 वर्ष होनी अनिवार्य है।