विजय वडेट्टीवार व देवेंद्र फडणवीस (सोर्स: सोशल मीडिया)
Congress Takes Revenge Chandrapur Defeat In Bhiwandi: भिवंडी-निजामपुर शहर महानगरपालिका के महापौर चुनाव के महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर किया है। इस चुनाव मे सेक्युलर फ्रंट के उम्मीदवार नारायण चौधरी ने बाजी मारी और वे भिवंडी के नये महापौर के रूप में चुने गए। इस जीत के साथ भिवंडी में राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है और बीजेपी के लिए यह हास एक बड़ा धक्का साबित हुई है, खासकर चंद्रपुर में बीजेपी की हालिया जीत के बाद कांग्रेस ने भिवंडी में अपनी ‘वापसी’ दिखाई है।
महापौर पद के लिए हुए इस चुनाव में नारायण चौधरी को 48 वोट मिले, जबकि उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी विलास रघुनाथ पाटिल को सिर्फ 25 वोट ही मिल सके। बीजेपी उम्मीदवार स्नेहल पाटिल को मात्र 16 वोटों पर संतुष्ट होना पड़ा। इस मतदान परिणाम से यह स्पष्ट हो गया कि नारायण चौधरी ने एक मजबूत बहुमत से जीत हासिल की।
इस चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार स्नेहल पाटिल की उम्मीदवारी को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। पाटिल की उम्मीदवारी से नाराज होकर बीजेपी के नगरसेवक नारायण चौधरी ने अपनी पार्टी से बगावत कर दी। चौधरी और उनके समर्थक नगरसेवकों ने बीजेपी को छोड़कर कांग्रेस और राकांपा के नेतृत्व में सेक्युलर फ्रंट से जुड़ने का निर्णय लिया। नारायण चौधरी को कांग्रेस, एनसीपी और शरद पवार के समर्थकों का पूरा साथ मिला और इस गठबंधन ने उन्हें महापौर पद के लिए 48 वोट दिलाए।
पक्षीय संख्याबल के अनुसार, कांग्रेस के पास 30, बीजेपी के पास 22, शिवसेना के पास 12, एनसीपी शरद पवार के पास 12, समाजवादी पार्टी के पास 6, कोणार्क विकास आघाड़ी के पास 4 और भिवंडी विकास आघाड़ी के पास 3 नगरसेवक थे।
भिवंडी महापौर चुनाव के लिए बहुमत का आंकड़ा 46 था। कांग्रेस और एनसीपी के 42 नगरसेवक पहले से थे लेकिन फिर नारायण चौधरी के नेतृत्व में बीजेपी के 9 बागी नगरसेवक भी उनके साथ जुड़ गए जिससे उनकी संख्या 51 हो गई और बहुमत आसानी से हासिल हो गया। इस प्रकार, नारायण चौधरी ने महापौर पद की जीत हासिल की।
भिवंडी में कांग्रेस के नेतृत्व में हुए इस राजनीतिक उलटफेर को चंद्रपुर मेयर चुनाव में बीजेपी की जीत का ‘बदला’ माना जा रहा है। चंद्रपुर में हाल ही में बीजेपी ने महापौर पद पर जीत हासिल की थी लेकिन भिवंडी में बीजेपी के हो बागी नगरसेवकों के साथ कांग्रेस ने इस जीत को अपने पक्ष में कर लिया। यह राजनीति में बदला लेने जैसा ही रहा, जहां कांग्रेस ने बीजेपी से महापौर पद छीन लिया।
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बता दें कि त्रिशंकु अवस्था में फंसी चंद्रपुर महानगरपालिका में भारतीय जनता पार्टी ने आखिरी समय में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को साथ लेकर एक बड़ा राजनीतिक ‘चमत्कार’ कर दिखाया है। यहां कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद सत्ता पर काबिज नहीं हो पाई। इस चुनाव में बीजेपी की संगीता खांडेकर ने महज एक वोट के मामूली अंतर से जीत दर्ज कर महापौर की कुर्सी पर कब्जा जमा लिया है।