अपनों ने ही लूटा! चंद्रपुर में बहुमत के बाद भी गंवाई सत्ता, वडेट्टीवार और धानोरकर पर गिरेगी गाज

Chandrapur Municipal Corporation Crisis: चंद्रपुर मनपा में जीत के बावजूद सत्ता गंवाने पर कांग्रेस सख्त। विजय वडेट्टीवार और प्रतिभा धानोरकर के बीच अंतर्कलह की होगी जांच। रमेश चेन्निथला ने दिए आदेश।
Congress to probe why it lost power in Chandrapur Municipal Corporation despite having the numbers. Ramesh Chennithala orders inquiry into Wadettiwar-Dhanorkar rift.
चंद्रपुर महानगरपालिका में कांग्रेस की अंतर्कलह (फाइल फोटो)
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Vijay Wadettiwar vs Pratiba Dhanorkar: चंद्रपुर स्थानीय मनपा में सर्वाधिक सीटें हासिल करने के बाद भी यहां सत्ता स्थापित करने में कांग्रेसी नेताओं की नाकामी को कांग्रेस हाईकमान ने गंभीरता से लेते हुए इस मामले की विस्तृत जांच करने के निर्देश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तथा महाराष्ट्र प्रभारी रमेश चेन्निथला ने दिए हैं।

कांग्रेस के स्थानीय नेता विजय वडेट्टीवार तथा सांसद प्रतिभा धानोरकर के बीच चल रही अंतर्कलह की लड़ाई से कांग्रेस को यहां सत्ता से वंचित रहने से हुए नुकसान पर कांग्रेस नेताओं ने तीखी नाराजगी व्यक्त की है, साथ ही इस विवाद की मनपा में कांग्रेस की दुर्गति की विस्तृत जांच करने के निर्देश भी चेन्निथला ने दिए है। इसके लिए एक जांच समिति गठित की जाएगी तथा कमिटी की रिपोर्ट कांग्रेस हाईकमान को सौंपी जाएगी।

वडेट्टीवार और धानोरकर के बीच झगड़ा

इस संदर्भ में बुधवार को मुंबई के कांग्रेस मुख्यालय में हुई पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की एक बैठक में चंद्रपुर मनपा में सत्तास्थापना को लेकर पार्टी के दो नेता वडेट्टीवार एवं धानोरकर के बीच चले झगड़े का ही मुद्दा गरमाया। पार्टी के दो नेताओं के बीच इस प्रकार की गुटबाजी, अंतर्कलह उचित नहीं, इससे पार्टी की प्रतिमा धूमिल होने की बात इस बैठक में नेताओं ने व्यक्त की।

चंद्रपुर मनपा में कांग्रेस गठबंधन के पास सत्तास्थापना के लिए पर्याप्त संख्याबल होने के बावजूद महज विजय वडेट्टीवार और धानोरकर के बीच चले विवाद से पार्षदों को एकसंघ रखने में नेताओं को मिली विफलता गंभीर बात होने की राय भी इस बैठक में नेताओं द्वारा व्यक्त की गई।

सहयोगी दल होने के बावजूद सत्ता से दूर हुई कांग्रेस

उल्लेखनीय है कि कुल 66 सदस्यीय स्थानीय मनपा में कांग्रेस गठबंधन के पास 30 पार्षद थे, सत्ता के लिए कांग्रेस गठबंधन को महज 4 अन्य पार्षदों की आवश्यकता थी।

राज्य में महाविकास आघाडी में कांग्रेस के साथ शामिल शिवसेना (यूबीटी) के पास यहां 6 पार्षद थे, साथ ही कांग्रेस के समविचारी दल वंचित बहुजन आघाडी के 2, एमआईएम और बसपा का एक-एक पार्षद थे। बावजूद इसके यहां महज 24 सीटों का संख्याबल वाली भाजपा गठबंधन ने शिवसेना (यूबीटी) की मदद से यहां सत्ता स्थापित करने में सफलता प्राप्त की है। यह मामला पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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