
समाजवादी पार्टी (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Bhiwandi Mayor Election: महाराष्ट्र के ठाणे जिले की भिवंडी निजामपुर शहर महानगरपालिका में महापौर का चुनाव अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन इसके पहले ही सियासी हलचल तेज हो गई है। सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपने-अपने गुट मजबूत करने में जुटे हुए हैं। इसी बीच समाजवादी पार्टी (सपा) के छह पार्षदों के अचानक नॉट रीचेबल होने से कांग्रेस की रणनीति को बड़ा झटका लग सकता है।
कांग्रेस ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी-एसपी) और सपा के साथ मिलकर ‘भिवंडी सेक्युलर फ्रंट’ का गठन किया था। इस फ्रंट के जरिए कांग्रेस महापौर पद पर कब्जा करने की तैयारी में थी, लेकिन सपा पार्षदों के संपर्क से बाहर होने के बाद गठबंधन की स्थिति कमजोर होती नजर आ रही है।
भिवंडी महानगरपालिका में कुल 90 सीटें हैं और महापौर चुनाव जीतने के लिए 45 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। हालिया चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जिसके 30 पार्षद निर्वाचित हुए हैं। इसके बाद भाजपा के 22, शिंदे गुट की शिवसेना के 12, एनसीपी के 12, सपा के 6, कोणार्क विकास आघाड़ी के 4, भिवंडी विकास मंच के 3 और एक निर्दलीय पार्षद चुना गया है।
सभी दलों ने कोंकण विभागीय आयुक्त कार्यालय में अपने-अपने गुटों का पंजीकरण करा लिया है। अब महापौर पद को लेकर राजनीतिक जोड़-तोड़ तेज हो गई है। शिवसेना, भाजपा, सपा, कोणार्क विकास आघाड़ी और भिवंडी विकास मंच भी अपने-अपने स्तर पर बहुमत जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।
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कांग्रेस की योजना थी कि सपा विधायक रईस शेख के प्रभाव और एनसीपी के सहयोग से भिवंडी में महापौर बनाया जाए। विधायक रईस शेख ने मनपा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में सक्रिय प्रचार किया था, जिसका फायदा कांग्रेस को मिला। हालांकि टिकट वितरण को लेकर नाराजगी के चलते सपा सिर्फ छह पार्षदों तक सिमट गई।
कांग्रेस, एनसीपी (एसपी) और सपा के 48 पार्षदों के साथ बने ‘भिवंडी सेक्युलर फ्रंट’ को बहुमत का आंकड़ा पार करने की उम्मीद थी, लेकिन अब सपा के सभी छह पार्षदों के नॉट रीचेबल होने से कांग्रेस का मेयर बनाने का सपना अधर में लटक सकता है।






