
सुप्रीम कोर्ट (सोर्स- सोशल मीडिया)
Supreme Court Strict Warning to Maharashtra Government: आरक्षण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं। यह चेतावनी ऐसे समय पर आई है जब राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों के लिए नामांकन पत्रों की जांच का काम शुरू होने वाला है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि किसी भी हाल में स्थानीय चुनावों में आरक्षण की कुल सीमा 50% से अधिक नहीं होनी चाहिए। अदालत ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि इस सीमा का उल्लंघन होता है, तो वह पूरे चुनाव को रद्द कर सकती है।
स्थानीय निकाय चुनावों में आरक्षण के मुद्दे पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को एक बहुत बड़ी चेतावनी दी है। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि अगर किसी भी क्षेत्र में आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से ज़्यादा पाई जाती है, तो अदालत को चुनाव पर रोक लगाने से कोई नहीं रोक सकता। जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाला बगची की बेंच इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई कर रही थी।
सीनियर एडवोकेट विकास सिंह और नरेंद्र हुड्डा ने कोर्ट में दलील दी कि राज्य के 40 प्रतिशत से ज्यादा निर्वाचन क्षेत्रों में 50% की आरक्षण सीमा का उल्लंघन किया गया है। उन्होंने दावा किया कि कुछ जगहों पर यह आरक्षण लगभग 70 प्रतिशत तक पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) को दिए गए 27% आरक्षण के कारण यह सीमा पार हुई है, जो कोर्ट के पिछले आदेश का उल्लंघन है।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी बताया कि कोर्ट ने 6 मई को आदेश दिया था कि चुनाव आयोग को बांठिया आयोग की रिपोर्ट आने से पहले के ओबीसी निर्देशों का पालन करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि चुनाव केवल उसी स्थिति के अनुसार कराए जा सकते हैं जो जे. के. बांठिया आयोग की रिपोर्ट आने से पहले लागू थी। आयोग ने ओबीसी श्रेणियों में 27 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश की थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक बांठिया आयोग की सिफारिशें पूरी तरह से लागू नहीं हो जातीं, तब तक चुनाव जुलाई 2010 से पहले के ओबीसी आरक्षण के हिसाब से ही होंगे।
महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले की सुनवाई 19 नवंबर के लिए टालने का अनुरोध किया, जिसे कोर्ट ने मान लिया।
कोर्ट ने राज्य सरकार को सख्ती से चेतावनी देते हुए कहा, “अगर आपकी दलील यह है कि नामांकन शुरू हो गए हैं और कोर्ट को अपना काम रोक देना चाहिए, तो हम सीधे चुनाव पर रोक लगा देंगे। इस अदालत की शक्तियों का इम्तिहान न लें।”पीठ ने यह भी जोर देकर कहा कि उनका कभी भी इरादा संविधान पीठ द्वारा तय की गई 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा को पार करने का नहीं था और दो-न्यायाधीशों की बेंच ऐसा नहीं कर सकती। कोर्ट ने उन याचिकाओं पर भी नोटिस जारी किया जिनमें आरक्षण 70% तक पहुंचने का आरोप लगाया गया है।
यह भी पढ़ें: गलत अंग्रेजी सिखाने पर शिक्षक निलंबित, वीडियो वायरल होने पर खुली पोल; जांच के बाद हुई कार्रवाई
महाराष्ट्र में 246 नगर परिषदों और 42 नगर पंचायतों के लिए चुनाव 2 दिसंबर को होने वाले हैं। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 17 नवंबर थी और नामांकन पत्रों की जांच 18 नवंबर से शुरू हो रही है। चुनाव परिणाम की घोषणा 3 दिसंबर को की जाएगी।






