Maharashtra farmer crisis (सोर्सः सोशल मीडिया)
Solapur Farmer: सोलापुर जिले में चीनी उद्योग की मिठास अब सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है, जबकि हकीकत में गन्ना किसान गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि जिले की 34 चीनी मिलों में से 31 मिलों पर 15 मार्च तक लगभग 950 करोड़ रुपये के गन्ने के बिल बकाया हैं।
किसान संगठनों के तीव्र आंदोलन के बाद मिलों ने पहली किस्त के रूप में 2500 से 3025 रुपये देने का ऐलान किया था। लेकिन अब वही मिलें FRP (फेयर एंड रेम्युनरेटिव प्राइस) की आड़ में किसानों को कम भुगतान करने की कोशिश कर रही हैं। खास बात यह है कि FRP चीनी उत्पादन पर आधारित होती है और कई मिलों में यह पहली घोषित किस्त से भी कम है। इससे साफ है कि मिलें अपने घोषित रेट से पीछे हटती नजर आ रही हैं।
कानून के अनुसार, गन्ने की पेराई के 14 दिनों के भीतर किसानों को पूरा भुगतान करना अनिवार्य है। लेकिन वास्तविकता यह है कि किसानों को अपने पैसे के लिए मिलों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
फरवरी के अंत तक जिले में 1 करोड़ 57 लाख 50 हजार 675 मीट्रिक टन गन्ने की पेराई हो चुकी थी, जिसके बदले किसानों को अब तक 3,643 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। FRP के अनुसार 26 मिलों पर 432 करोड़ रुपये बकाया हैं, जबकि मिलों द्वारा घोषित पहली किस्त के आधार पर लगभग 950 करोड़ रुपये का भुगतान अब भी लंबित है।
इस देरी के कारण किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है और उनकी आगे की खेती की योजना प्रभावित हो रही है। गन्ने का भुगतान न मिलने से किसानों के लिए लोन चुकाना मुश्किल हो गया है, जबकि मार्च के अंत तक शून्य ब्याज दर पर लिए गए फसल ऋण चुकाने की अंतिम तिथि नजदीक है। किसानों को डर है कि समय पर भुगतान न करने पर ब्याज का अतिरिक्त बोझ बढ़ जाएगा।
जिले के गन्ना किसान आक्रोशित हैं और उन्होंने जल्द ही उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। उनकी मांग है कि सरकार और प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप कर कानूनी समयसीमा का पालन न करने वाली चीनी मिलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।
पिछले महीने हुए आंदोलन के बाद प्रशासन ने 10 मार्च तक RRC कार्रवाई का आश्वासन दिया था। इस संदर्भ में जिले की 17 फैक्ट्रियों की सुनवाई हो चुकी है। आंदोलन के बाद बकाया FRP में 100 करोड़ रुपये की कमी आई है।
विजय रणदिवे, जिला अध्यक्ष, स्वाभिमानी शेतकरी संगठन, सोलापुर ने कहा कि प्रशासन को फैक्ट्रियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए मजबूर किया जाएगा, ताकि किसानों को 100 प्रतिशत FRP मिल सके। उन्होंने चेतावनी दी कि 1 अप्रैल के बाद उग्र आंदोलन किया जाएगा।
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गन्ना मूल्य नियंत्रण बोर्ड के सदस्य प्रो. सुहास पाटिल ने कहा कि किसानों को तब तक शांत नहीं बैठना चाहिए जब तक उन्हें पहली किस्त का पूरा भुगतान नहीं मिल जाता। उन्होंने किसानों से संगठित होकर लड़ाई लड़ने का आह्वान किया।
वहीं, सिद्धेश्वर शुगर फैक्ट्री के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर समीर सालगर ने कहा कि केंद्र सरकार हर साल FRP बढ़ाती है, लेकिन महंगाई के डर से चीनी का MSP नहीं बढ़ाया जाता। पिछले पांच वर्षों से MSP में कोई वृद्धि नहीं हुई है, जिससे मिलों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है