
भाजपा नेता और अजित पवार (सोर्स: सोशल मीडिया)
Anagar Nagar Parishad Election Nomination Controversy: हमेशा से निर्विरोध चुनाव के लिए अलग पहचान बनाए रखने वाली महाराष्ट्र के सोलापुर जिले की अनगर नगर परिषद में इस बार लोकतंत्र भी हार गया। यहां नामांकन को लेकर दो पार्टियों में काफी बवाल हुआ।
अध्यक्ष पद के लिए तीन दिनों से लगातार अपना नामांकन फार्म जमा करने के प्रयासों के बाद जब एनसीपी उम्मीदवार उज्जवला थिटे ने सोमवार को कड़ी सुरक्षा के बीच अपना फार्म जमा किया तो रिटर्निंग ऑफिसर ने जांच के बाद यह कहते हुए नामांकन खारिज कर दिया कि उस पर प्रस्तावक के हस्ताक्षर नहीं थे।
इस तरह अब अध्यक्ष पद के लिए यहां भाजपा की ओर से राजन पाटिल की पुत्रवधू प्राजक्ता पाटिल और निर्दलीय उम्मीदवार सरस्वती शिंदे ही मैदान में हैं, रिटर्निंग ऑफिसर ने दोनों के आवेदन वैध घोषित किए हैं। हालांकि आवेदन वापस लेने की अंतिम तारीख 21 नवंबर है, इसलिए आगे की तस्वीर इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्दलीय उम्मीदवार सरस्वती शिंदे अपना आवेदन वापस लेती हैं या नहीं।
एनसीपी उम्मीदवार उज्जवला थिटे के आवेदन पर सरस्वती शिंदे ने ही आपत्ति दर्ज करवाई थी, जिसके बाद जांच में थिटे का आवेदन रद्द कर दिया गया। इससे पहले अनगर नगर परिषद अध्यक्ष पद का चुनाव भाजपा और एनसीपी (अजित गुट) आमने-सामने होने से खासा चर्चा में था। मालूम हो कि पूर्व विधायक राजन पाटिल पिछले कई वर्षों से राकांपा में रहने के बाद और कुछ महीने पहले ही भाजपा में शामिल हुए थे।
अनगर नगर परिषद अध्यक्ष पद के लिए कोई भी नामांकन जमा न हो, इसके लिए कथित तौर पर भाजपा उम्मीदवार के समर्थकों द्वारा दूसरे उम्मीदवारों को लगातार डराया, धमकाया जा रहा था।
सुबह से देर शाम तक रिटर्निंग ऑफिसर कार्यालय को जाने वाली सड़क पर बड़ी संख्या में समर्थकों की भीड़ के साथ ही ट्राले और अन्य वाहन खड़े कर दिए जा रहे थे। जिसकी शिकायत राज्य निर्वाचन आयोग को करने के बाद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।
फार्म में प्रस्तावक के हस्ताक्षर नहीं होने का हवाला देते हुए रद्द किए आवेदन को लेकर उज्जवला थिटे के प्रस्तावक उनके बेटे जयवंत थिटे का कहना है कि लगातार शिकायत के बाद हम सोमवार को कड़ी सुरक्षा में फॉर्म जमा कर सके। इस दौरान हमने पूरी वीडियोग्राफी भी करवाई।
जयवंत ने कहा कि जब मेरी मां नामांकन पत्र जमा कर रही थीं, तो चुनाव अधिकारी जानना चाहते थे कि प्रस्तावक कौन है। जब मैं आगे बढ़ा, तो मुझसे फॉर्म पर हस्ताक्षर करने को कहा गया। हालांकि मैंने अपनी मां द्वारा फॉर्म जमा करते हुए सभी वीडियो बना लिए हैं, लेकिन चुनाव कार्यालय के पास भी मेरे हस्ताक्षर करते हुए वीडियो जरूर होंगे।
यह कैसे संभव है कि इतनी मुश्किलों से फॉर्म जमा करने मिला और हम हस्ताक्षर करना भूल जाएं। इस मामले में शिकायत के बाद अब राज्य चुनाव आयुक्त दिनेश वाघमारे ने जिला कलेक्टर कुमार आशीर्वाद से रिपोर्ट मांगी है। राकांपा जिला इकाई के अध्यक्ष उमेश पाटिल ने आरोप लगाया कि इसमें कुछ गड़बड़ी हुई है। हमारा पूरा संदेह है कि हस्ताक्षर किसी रसायन का उपयोग करके मिटा दिए गए।
एनसीपी उम्मीदवार उज्जवला थिटे विधवा हैं और अनगर से 12 किलोमीटर दूर मोहोल में रहती हैं। उन्होंने बताया कि मैंने अपने संपत्ति कर और जल कर के भुगतान की रसीदों के लिए आवेदन किया लेकिन परिषद कार्यालय ने नहीं दीं। मुझे ‘अदेयता’ प्रमाण पत्र देने से भी इनकार कर दिया गया।
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मैंने मतदाता सूची की एक प्रति के लिए आवेदन किया है, जिसे सीईओ ने देने से इनकार कर दिया। मैंने शौचालय बनाने और उसका उपयोग करने के प्रमाण पत्र के लिए भी आवेदन किया लेकिन परिषद ने मुझे प्रमाण पत्र देने से इनकार कर दिया। अधिकारी कह रहे हैं कि आप पुणे में रहती हैं, इसलिए हम आपको प्रमाण पत्र नहीं दे सकते।
इधर परिषद में भाजपा नेता राजन पाटिल के नेतृत्व में पार्षद पद के लिए 17 में से 17 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। हालांकि इसकी औपचारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन पूर्व विधायक राजन पाटिल के समर्थकों ने पटाखे फोड़कर और मालाएँ पहनाकर बुधवार को जश्न मनाया।






