Satara School Hostel Child Abuse Case प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स AI)
24 Children Sexually Abused Satara: महाराष्ट्र के सतारा शहर से एक अत्यंत विचलित करने वाली और दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक प्रतिष्ठित स्कूल के छात्रावास (Hostel) में 24 बच्चों के यौन और मानसिक उत्पीड़न का मामला उजागर हुआ है। इस घिनौने कृत्य को अंजाम देने का आरोप स्कूल के ही एक वार्ड बॉय ऋषिकेश सुभाष चव्हाण पर लगा है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, पीड़ितों की संख्या बढ़ती जा रही है, जिससे पूरे जिले में अभिभावकों के बीच भारी रोष और चिंता का माहौल है।
सतारा जिला पुलिस अधीक्षक तुषार दोषी के अनुसार, पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था, हालांकि हालिया जानकारी के मुताबिक अदालत ने उसे जमानत पर रिहा कर दिया है, जिससे न्याय की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
आरोपी ऋषिकेश चव्हाण पिछले चार महीनों से इस नामी स्कूल के छात्रावास में अस्थायी वार्ड बॉय ‘देखभालकर्ता’ (Caretaker) के रूप में तैनात था। शुरुआत में केवल तीन बच्चों ने हिम्मत जुटाकर अपने माता-पिता को आपबीती सुनाई थी, लेकिन जब पुलिस ने सखोल जांच शुरू की और अन्य बच्चों से संवाद किया, तो शिकायतों का अंबार लग गया। अब तक कुल 24 बच्चों के अभिभावकों ने लिखित शिकायत दर्ज कराई है कि उनके बच्चों के साथ हॉस्टल की चारदीवारी के भीतर दुर्व्यवहार किया गया।
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अभिभावकों द्वारा लगाए गए आरोप रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपी वार्ड बॉय:
यौन उत्पीड़न: बच्चों के निजी अंगों को गलत तरीके से छूता था।
धमकाना और मारपीट: विरोध करने पर मासूम बच्चों को बुरी तरह पीटता था और उन्हें किसी को न बताने की धमकी देता था।
पैसे की मांग: आरोपी बच्चों से उनके घर से पैसे मंगवाने के लिए भी दबाव डालता था।
अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने वार्ड बॉय की नियुक्ति के समय उसके चरित्र की ठीक से जांच नहीं की, जिसका खामियाजा छोटे बच्चों को भुगतना पड़ा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सतारा पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अधीक्षक तुषार दोषी ने स्पष्ट किया कि 24 बच्चों के बयान और साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। हालांकि, इतने गंभीर आरोपों के बावजूद आरोपी को अदालत से जमानत मिल जाना चर्चा का विषय बना हुआ है। पुलिस अब उच्च न्यायालय में जमानत रद्द करने की याचिका दायर करने पर विचार कर रही है ताकि जांच प्रभावित न हो।
इस घटना ने एक बार फिर आवासीय विद्यालयों (Boarding Schools) में बच्चों की सुरक्षा और वहां के कर्मचारियों के पुलिस वेरिफिकेशन की अनिवार्यता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।